क्या बॉर्डर की सुरक्षा को लेकर सरकारें गंभीर नहीं - इनसाइड स्टोरी

पाकिस्तान से लगती बॉर्डर पर सुरक्षा के समन्वय और निगरानी के लिए हर तीन महीने में स्टेट लेवल स्टैंडिंग कमेटी (State level standing committee)की बैठक होना जरूरी है लेकिन तीन साल में भी बैठक नहीं हो पाई. 

क्या बॉर्डर की सुरक्षा को लेकर सरकारें गंभीर नहीं - इनसाइड स्टोरी
बॉर्डर मैनेजमेंट की बैठक के दौरान बॉर्डर सुरक्षा की समीक्षा

विष्णु शर्मा, जयपुर: पाकिस्तान से लगती बॉर्डर पर सुरक्षा(border security) को राज्य सरकार कतई गंभीर नहीं हैं. बॉर्डर पर सुरक्षा, समन्वय और निगरानी के लिए हर तीन महीने में स्टेट लेवल स्टैंडिंग कमेटी (State level standing committee)की बैठक होना जरूरी है लेकिन तीन साल में भी बैठक नहीं हो पाई. ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि बॉर्डर पर सुरक्षा को लेकर कांग्रेस- पिछली भाजपा सरकार कितनी गंभीर हैं इधर गृहमंत्रालय(home Ministry) के निर्देश के बाद अब 26 नवम्बर को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित स्टेट लेवल स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होगी. 
भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान से सम्बंध अच्छे नहीं है पाकिस्तान की ओर से आए दिन बॉर्डर पर कुछ न कुछ अवांछनीय हरकतें सामने आ रही हैं करीब चार साल पहले केंद्रीय गृहमंत्रालय ने पाकिस्तान से सटी बॉर्डर पर सुरक्षा मैकेनिज्म डवलप करने का निर्णय लिया तत्कालीन  केंद्रीय गृहमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में बॉर्डर से सटे राज्यों के मुख्य सचिवों  की अध्यक्षता स्टेट लेवल स्टैडिंग कमेटी बनाई थी और मंत्रालय से इसके आदेश भी जारी हो गए थे। इस कमेटी हर तीन महीने में बैठक होनी थी, लेकिन राजस्थान में वर्ष 2016 के बाद एक बार भी बैठक नहीं हुई. ऐसे में गृहमंत्रालय की बॉर्डर मैनेजमेंट विंग की तरफ से राज्य सरकारों को पत्र लिखा गया. 
सुरक्षा तंत्र का होना था निर्माण
देश के जम्मू एंड कश्मीर, राजस्थान, पंजाब और गुजरात की सीमा पाकिस्तान से सटी हुई है. 7 अक्टूबर 2016 को गृहमंत्री की अध्यक्षता में जैसलमेर में बैठक हुई. बैठक में  भारत पाकिस्तान सीमा पर राज्य में एक संस्थागत तंत्र निर्माण और सुरक्षा पर चर्चा हुई भारत-पाकिस्तान सीमा की सीलिंग के बारे में विचार किया गया बैठक के सभी सीमावर्ती राज्यों जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, पंजाब और गुजरात में सुरक्षा-समन्वय पर निर्णय किया गया. 
तीन साल पहले गठित हुई थी कमेटी 
जानकारी के अनुसार 1 नवम्बर 2016 को गृहमंत्रालय ने राज्य स्तरीय स्टैंडिंग कमेटी का गठन किया गया  कमेटी में एसीएस गृह, डीजीपी, एडीजी बीएसएफ पश्चिम कमान, बॉर्डर मैनेजमेंट के जेएस, मुख्य अभियंता सीपीडब्ल्यूडी,  बीएसएफ आईजी जोधपुर,  नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, रेवन्यू इंटेलीजेंस और आईबी के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया.  राज्य स्तर पर प्रभावी समन्वय के लिए बीएसएफ के आईजी के साथ कम से कम हर महीने नियमित रूप से बैठक के निर्देश दिए गए.
सुरक्षा की समीक्षा तो पता चला 
गृहमंत्रालय के बॉर्डर मैनेजमेंट की बैठक के दौरान बॉर्डर सुरक्षा की समीक्षा की गई इस पर सामने आया की राज्यों में बैठक हो रही है या नहीं इसके बाद बॉर्डर मैनेजमेंट के अपर सचिव विकास श्रीवास्तव की ओर से राज्य के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता को पत्र लिखा गया. बॉर्डर मैनेजमेंट ने स्टैंडिंग कमेटी की बैठक की तारीख और स्थान की सूचना मांगी. इसके बाद गृह विभाग की ओर से 26 नवम्बर को कमेटी की बैठक बुलाए जाने की सूचना भेजी गई. 
स्टैंडिंग कमेटी का यह है काम 
-सीमा पर किसी भी उल्लंघन के मामले में उचित प्रतिक्रिया, सुरक्षा तंत्र सहित सीमा सुरक्षा ग्रिड विकसित करना. 
-सीमा सुरक्षा ग्रिड और अन्य समन्वय मामलों के कार्यों की नियमित समीक्षा. बीएसएफ और अन्य एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय रखना. 
-राज्य पुलिस की वृद्धि की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करना. 
-राज्य में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थिति की व्यापक समीक्षा. 
-आईबी पर खतरे को हल करने की समीक्षा  करना  राज्य में सीमा पर किसी भी विशिष्ट धमकी के मामले में काउंटर उपायों की आवश्यकता बताना  
-सीमा अवसंरचना परियोजना की समीक्षा और बाधाओं का समाधान करना
अभी नहीं है समन्वय   
जानकार सूत्रों का कहना है कि बॉर्डर सुरक्षा के मामले में बीएसएफ, स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों में समन्वय नहीं है बीएसएफ व अन्य सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बॉर्डर पर कोई संदिग्ध पकड़ा जाता है तब पुलिस मामले में एफआर लगा देती है वहीं स्थानीय पुलिस का कहना है कि बीएसएफ व सुरक्षा एजेंसियां पुलिस का सहयोग नहीं करती है संदिग्ध को पकड़ने के दौरान पुलिस को साथ नहीं लेती है ऐसे में बैठक के दौरान इन तमाम मुद्दों पर चर्चा होगी.