गृह मंत्री NRC लागू करने की प्रतिबद्धता को धमकी की तरह जता रहे हैं: अशोक गहलोत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर कल जयपुर में कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठन एनआरसी और सीएए के विरोध में पैदल मार्च करेंगे.

गृह मंत्री NRC लागू करने की प्रतिबद्धता को धमकी की तरह जता रहे हैं: अशोक गहलोत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील भी की.

जयपुर: एनआरसी और सीए के विरोध में पूरा देश जल रहा है. देश के एक दर्जन राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शांति मार्च के जरिए देश में एक नजीर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर कल जयपुर में कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठन एनआरसी और सीएए के विरोध में पैदल मार्च करेंगे. सुबह 11:00 बजे अल्बर्ट हॉल से लेकर गांधी सर्किल तक पैदल मार्च निकाला जाएगा.

एनआरसी और सीए के विरोध में कांग्रेस कल जयपुर में शांति मार्च निकालेगी शांति मार्च की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अल्बर्ट हॉल से लेकर गांधी सर्किल तक के रूट का जायजा लिया. सुबह 11:00 बजे अल्बर्ट हॉल से लेकर शांति मार्च गांधी सर्किल तक जाएगा. कांग्रेस के नेताओं के अलावा इसमें सिविल सोसायटी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज शांति मार्च को लेकर प्रेस वार्ता की प्रेस वार्ता में देश के हालातों को लेकर चिंता जाहिर करते हुए गहलोत ने कहा कि देश में जो हालात बने हैं वह दुर्भाग्यपूर्ण है. इस देश में जो लोग हिंसा कर रहे हैं वह बहुत ही दुखद है. उत्तरप्रदेश में 11 लोगों की जान जाने की खबर आ रही है. हिंसक प्रदर्शन में लोग घायल हो रहे हैं, देश में चिंतनीय हालात बने हुए हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की है.

अशोक गहलोत ने कहा है कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है. हिंसा करने वाले और हिंसा फैलाने वाले आमजन के दुश्मन हैं. विरोध करने के संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल हो, शांतिपूर्ण प्रदर्शन हों लेकिन हिंसा की सभी को निंदा करनी चाहिए.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा की जिस रूप में इस कानून को लेकर सरकार की तरफ से लोगों को भ्रम में रखा गया है, उसने लोगों को भड़काने का काम किया. गृह मंत्री एनआरसी लागू करने की प्रतिबद्धता धमकी की तरह जता रहे हैं. उनकी पार्टी के कई लोग भड़काऊ बयानबाजी करते हैं. धार्मिक आधार पर लोगों को देश से बाहर करने और बसाने को लेकर सरकार खुद अफवाह फैला रही है. इस संवेदनशील समय में सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश की सरकार में बैठे लोगों की बनती थी, लेकिन दुर्भाग्य से जनभावना को समझने में वे पूरी तरह विफल रहे उसी का परिणाम है, हालात इतने बिगड़ गए.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की वहीं सरकार से आग्रह किया कि देश उबल रहा है. लोगों की जानें जा रही हैं. ऐसे हालातों में इस कानून को वापस लें. इस विभाजन काली फैसले से मुल्क का भला नहीं होने वाला. अब देश में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों से भी इस फैसले के खिलाफ आवाज उठने लगी है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी सरकार से आग्रह किया है कि धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार दो लोकतंत्र के मूल सिद्धांत हैं. अशोक गहलोत ने कहा है कि सिर्फ अमेरिका की ही बात नहीं पूरे विश्व की निगाह भारत पर लगी हुई है कि गांधी के मुल्क में ऐसे हालात कैसे बने, यह हो क्या रहा है. 

बता दें कि, जयपुर में होने वाले शांति मार्च का मूल मकसद एनआरसी और सीएए का विरोध करना तो है ही साथ ही देश में एक संदेश भी देना है कि विरोध करने का तरीका शांतिपूर्ण भी हो सकता है. गांधी और बुद्ध के देश में हिंसा नहीं होनी चाहिए.