महापुरूषों के पाठ्यक्रम में छेड़छाड़ कर रही अशोक गहलोत सरकार: वासुदेव देवनानी

वासुदेव  देवनानी ने कहा कि, इस विवाद के कारण राजस्थान के राजपूत समाज में रोष व्याप्त है और एक बड़ा आंदोलन करने की तैयारियां की जा रही है.

महापुरूषों के पाठ्यक्रम में छेड़छाड़ कर रही अशोक गहलोत सरकार: वासुदेव देवनानी
वासुदेव देवनानी ने गहलोत सरकार महापुरुषों के पाठ्यक्रम में छेड़छाड़ का आरोप लगाया है.

अशोक सिंह भाटी/अजमेर: महाराणा प्रताप और अकबर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. रविवार को अजमेर उत्तर से विधायक व पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने एक बार फिर से अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार पर तुष्टीकरण करने और महापुरुषों के पाठ्यक्रम में छेड़छाड़ का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा कि, कांग्रेस की सरकार महाराणा प्रताप के गौरवशाली इतिहास को नहीं मान रही, जिसके चलते बिना इतिहासकारों के ही पाठ्यक्रम में बदलाव कर दिया गया और उसमें कई काट-छाठ की गई है. ऐसे में इस विवाद के कारण राजस्थान के राजपूत समाज में रोष व्याप्त है और एक बड़ा आंदोलन करने की तैयारियां की जा रही है.

विधायक ने कहा कि, दसवीं के पाठ्यक्रम में छेड़छाड़ करने के साथ ही बारहवीं कक्षा के इतिहास में भी हल्दीघाटी को लेकर विवादित बात कही गई है. जहां घाटी के अस्तित्व को ही मिटाने का प्रयास किया गया और बताया गया कि, हल्दी घाटी का नाम डेढ़ सौ महिलाओं द्वारा हल्दी लगाए जाने पर किया गया है.

दरअसल, मेवाड़ राजवंश और हल्दी घाटी से जुड़े पाठ्यक्रम के विवाद का जिन्न एक बार फिर से बाहर निकल गया है. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा की किताबों में छपे लेखों ने एक बार फिर से विवाद खड़ा कर दिया है.

नई छपी किताबों में महाराणा प्रताप उदय सिंह को बनवीर का हत्यारा बताया गया है. साथ ही, किताब के पहले अध्याय में राजस्थान के प्रमुख राजपूत राजवंश का परिचय दिया गया है, जिसमें पेज नम्बर 11 पर लिखा गया है कि, 1537 ईसवीं में उदय सिंह का राज्याभिषेक हुआ.

इसके साथ ही, 1540 ईसवीं में मावली के युद्द में उदय सिंह ने मालदेव के सहयोग से बनवीर की हत्या कर मेवाड़ का पैतृत्व सत्ता प्राप्त की थी. 1559 में उदयपुर में नगर बसाकर राजधानी बनाया. वहीं, दूसरी ओर पेज नम्बर 12 पर हल्कीघाटी के नामकरण को लेकर भी अजीबोंगरीब तर्क दिए गए हैं.

यहां डॉक्टर महेन्द्र भाणावत की किताब अजूबा भारत के हवाले से लिखा गया है कि, हल्दीघाटी नाम हल्दी के रंगी मिट्टी के कारण नहीं पड़ा है. ये लाल,पीली और काली मिट्टी है. फिर हल्दी घाटी नाम क्यूं दिया गया तो इसका किताब में तर्क दिया गया है कि, यहां हल्दी चढ़ी कई नवविवाहिता पुरुष वेष में युद्ध करते हुए लड़ मरी थी.

इससे पहले पिछले साल भी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में हल्दीघाटी युद्ध में प्रताप की हार बताते हुए कारणों का उल्लेख किया गया था. हालांकि, पुस्तक में सीधे तौर पर हार का जिक्र नहीं किया गया था. लेकिन किताब में महाराणा प्रताप के प्रतिकूल परिस्थितियों का जिक्र किया गया था.

हालांकि, नई किताबों में से इसे हटाकर बदलाव किया गया है. लेकिन नई किताबों में एक बार फिर से उदय सिंह और हल्दीघाटी के युद्ध को लेकर नये विवाद खड़े होते जा रहे हैं.