राजस्थान: अशोक गहलोत की पहल से टूटने से बचे कांग्रेस विधायक, 5 दिन तक की खातिरदारी

राजस्थान में इन विधायकों की मेहमाननवाजी से लेकर उन्हें जागरूक और एकजुट रखने में अशोक गहलोत और उनकी टीम की बड़ी अहम भूमिका रही है. 

राजस्थान: अशोक गहलोत की पहल से टूटने से बचे कांग्रेस विधायक, 5 दिन तक की खातिरदारी
अशोक गहलोत. (फाइल फोटो)

जयपुर: कई राज्यों में बीजेपी (BJP) की हॉर्स ट्रेडिंग (Horse Trading) की रणनीति का शिकार हो चुकी कांग्रेस (Congress) पार्टी इस बार अपनी बेहतरीन रणनीति के तहत अपने विधायकों के दल को टूटने से बचाने में कामयाब रही है. इसका पूरा श्रेय राजस्थान कांग्रेस (Congress) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनकी टीम को दिया जा रहा है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में जब राष्ट्रपति शासन लग चुका है, तब कांग्रेस (Congress) अपने विधायकों को आगे की रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए मुंबई भेज चुकी है. राजस्थान में इन विधायकों की मेहमाननवाजी से लेकर उन्हें जागरूक और एकजुट रखने में अशोक गहलोत और उनकी टीम की बड़ी अहम भूमिका रही है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पुराने सहयोगी महाराष्ट्र कांग्रेस (Congress) में मुंबई रीजन के प्रभारी और राजस्थान कांग्रेस (Congress) के प्रभारी का जिम्मा संभाल रहे अविनाश पांडे के साथ मिलकर रणनीति तैयार की.

इन दोनों नेताओं ने पार्टी आलाकमान को पूरी योजना से अवगत कराया और हरी झंडी मिलने के बाद 8 नवंबर की शाम को महाराष्ट्र कांग्रेस (Congress) के सभी विधायकों को जयपुर से 20 किलोमीटर दूर एक रिसॉर्ट में ठहरने का इंतजाम किए. इस रणनीति के बाद भी अशोक गहलोत और उनकी विश्वसनीय नेताओं की टीम ने 5 दिन तक लगातार मुंबई कांग्रेस (Congress) के विधायकों की न केवल खातिरदारी की बल्कि उनकी निगरानी का भी पूरी तरीके से जिम्मा संभाले रखा. इन नेताओं में चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा विधानसभा में मुख्य सचेतक महेश जोशी कृषि मंत्री लालचंद कटारिया आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत बीज निगम के पूर्व अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ और कांग्रेस (Congress) नेता अरुण कुमावत शामिल रहे. 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अविनाश पांडे के नेतृत्व में इन नेताओं की टीम ने न केवल रिसॉर्ट में ठहरे महाराष्ट्र कांग्रेस (Congress) के नेताओं के मनोबल को बढ़ाने का काम किया बल्कि उन में एकजुटता बनाए रखने के लिए भी हर संभव प्रयास किए. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार पांच दिन इन विधायकों के संपर्क में रहे. राजस्थान के सरकारी कामकाज में व्यस्तता के बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रोजाना जयपुर से 20 किलोमीटर बाहर रिजॉर्ट में जाकर न केवल उनके साथ मैराथन बैठकें की बल्कि पार्टी आलाकमान की आगामी रणनीतियों के बारे में भी उन्हें जानकारी देते रहे. 

नहीं बनाया गया बंधक
ऐसा नहीं है कि इन विधायकों को जयपुर में बंधक बनाकर रखा गया बल्कि इन्हें घूमने फिरने की भी पूरी आजादी दी गई. अधिकांश विधायक जयपुर के अलावा अजमेर पुष्कर सालासर जैसे स्थानों की यात्रा भी कर कर आए. इन विधायकों ने जयपुर की खूबसूरती को भी निहारा. यहां के दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया. यहां की लजीज व्यंजनों का भी आनंद उठाया. इन विधायकों को कहीं भी ऐसा महसूस नहीं होने दिया गया कि उन्हें एक तरीके से अपने राज्य से लाकर दूसरे राज्य में रखा गया है.

राष्ट्रपति शासन से खुश हुए कांग्रेस के विधायक
चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा हो या कांग्रेस (Congress) नेता धर्मेंद्र राठौड़, आरसीए अध्यक्ष वैभव गहलोत और महेश जोशी जैसे नेता सुबह से शाम तक मुस्तैदी से रिसॉर्ट में कांग्रेस (Congress) की रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए जुटे रहे. जब 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगने की खबर आई, तब महाराष्ट्र कांग्रेस (Congress) के सभी विधायकों ने खुशी का इजहार किया. विधायकों ने कहा यह उनकी जीत है. इससे बीजेपी (BJP) को सत्ता से दूर रखने में वे कामयाब रहे हैं. वे एनसीपी और शिवसेना के साथ पार्टी आलाकमान के निर्देशों के अनुसार आगे की रणनीति पर काम करेंगे. 

अशोक गहलोत ने बखूबी निभाई जिम्मेदारी
दरअसल इस पूरी रणनीति की पीछे बड़ी वजह यह थी कि कर्नाटक, गोवा सहित कई राज्यों में इससे पहले कांग्रेस (Congress) अपने विधायकों को एकजुट नहीं रखने की कीमत चुका चुकी है. यही वजह है कि पार्टी आलाकमान ने इस बार अपने सबसे विश्वसनीय नेता अशोक गहलोत पर पूरी जिम्मेदारी सौंपी. अशोक गहलोत ने उस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया है. राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अब सब विधायकों को मुंबई भेजा जा चुका है, जहां कांग्रेस (Congress) पार्टी की आगे की रणनीति का भी हिस्सा बनेंगे.