जोधपुर: कोरोना ने ज्योतिषियों-पंडितों की आय पर भी लगाया 'ब्रेक', सरकार से की यह मांग...

पूजा-पाठ और अनुष्ठान करवाकर इससे मिलने वाली दक्षिणा से जीवनयापन करने वाले कर्मकांडी ब्राह्मणों की हालत भी, इस कोरोना (Corona) महामारी में खराब है. 

जोधपुर: कोरोना ने ज्योतिषियों-पंडितों की आय पर भी लगाया 'ब्रेक', सरकार से की यह मांग...
जोधपुर के ज्योतिष और पंडित भी सरकार से सहायता की मांग कर रहे हैं.

भवानी भाटी/जोधपुर: कोरोना महामारी को लेकर देशभर में लॉकडाउन (Lockdown) से लोग मुश्किल में है. अलग-अलग वर्ग के लोगों की अपनी पीड़ा है. सबसे बड़ा संकट लोगों के सामने आजीविका और रोजगार का है. पूजा-पाठ और अनुष्ठान करवाकर इससे मिलने वाली दक्षिणा से जीवनयापन करने वाले कर्मकांडी ब्राह्मणों की हालत भी, इस कोरोना (Corona) महामारी में खराब है. अब इनके सामने रोजगार का कोई साधन नहीं रहा है. ऐसे में यह लोग भी अब सरकार की तरफ देख रहे हैं.

दरअसल, जोधपुर के ज्योतिषियों और पंडितों ने पूरी दुनिया में नाम कमाया है. स्वर्गीय डॉ नारायण दत्त श्रीमाली, डॉक्टर राधाकृष्ण श्रीमाली व डॉक्टर भोजराज द्विवेदी और वर्तमान में सुरेश श्रीमाली देश ही नहीं पूरी दुनिया में मशहूर है. इन बड़े नामों के अलावा सैकड़ों ऐसे ज्योतिषी और कर्मकांड पंडित है, जिनकी रोजी-रोटी ज्योतिष और कर्मकांड का काम ही है.

यजमानों से मिलने वाली दक्षिणा से ही उनका और उनके परिवार का जीवनयापन होता है. करीब दो महीने से अधिक दिनों से लॉकडाउन जारी रहने से, इन ज्योतिषियों और कर्मकांडी पंडितों के आय का एकमात्र स्रोत बंद हो गया है. उनकी थोड़ी जमापूंजी भी खत्म हो गई है. अब यह लोग भी सरकार से सहायता की मांग कर रहे हैं.

लॉकडाउन के कारण न तो पंडित घरों से निकल सकते हैं और न ही उनके यजमान. ऐसे में जिन सरोवरों पर हवन तर्पण विसर्जन आदि कर्मकांड होते थे, वे अब सूने पड़े हैं. शहर में ऐसा ही एक जलाशय पदम सागर है, जहां साल भर पंडितों और उनके यजमानों की भीड़ लगी रहती थी.

अब यह पदम सागर घाट पूरी तरह से सूना है. पंडित सरकार से सहायता मांग रहे हैं और जल्द ही लॉकडाउन हटाने की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही, मृतक कर्म नारायण बलि जैसे कर्मकांड नहीं करने से होने वाले नुकसान की, मान्यताएं भी बताते हैं. पंडितों का कहना है कि, लॉकडाउन के कारण वे नारायण बलि जैसे मृतक कर्म कराने के लिए जा नहीं पाए. इससे मरने वाले लोगों की आत्मा को मुक्ति नहीं मिली है. ये आत्माएं भटकती रहेगी और साथ ही उनके परिवारों के लोग परेशान होते रहेंगे.