Astrology: चंद्रमा और मनोरोगों का है आपसी कनेक्शन, ऐसे पाएं इससे जुड़े कष्टों से छुटकारा

विभिन्न प्रकार के सांसारिक दबाव के चलते अवसाद, दुख, चिंता, डिप्रेशन और बेचैनी से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो बेहद चिंताजनक है.  

Astrology: चंद्रमा और मनोरोगों का है आपसी कनेक्शन, ऐसे पाएं इससे जुड़े कष्टों से छुटकारा
चंद्रमा और मनोरोगों का है आपसी कनेक्शन. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Jaipur: आज के इस आधुनिक युग में कई बार लोगों को डिप्रेशन, एंजाइटी और मनोरोगों का सामना करना पड़ रहा है. विभिन्न प्रकार के सांसारिक दबाव के चलते अवसाद, दुख, चिंता, डिप्रेशन और बेचैनी से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो बेहद चिंताजनक है.

ज्योतिषाचार्य सुमित रस्तौगी के मुताबिक, ‘कई बार व्यक्ति की जन्मपत्रिका में चंद्रमा इतना पीड़ित या ऐसी अवस्था में होता है कि डिप्रेशन और मनोरोग व्यक्ति को कब घेर लेता है, ये व्यक्ति को खुद भी पता नहीं चलता. चूंकि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मनऔर मस्तिष्क का कारक ग्रह माना जाता है इसलिए उन परिस्थितियों को जानना बेहद जरूरी है जब चंद्रमा के पीड़ित होने के चलते व्यक्ति बेहद कठिनाइयों में घिर जाता है.

आइये जानते है ज्योतिष विश्लेषण सुमित रस्तौगी से की कब होता है ऐसा
जब भी मन का कारक चन्द्रमा पीड़ित होगा तो मानसिक पीड़ा अवश्य देगा.

     चंद्रमा कब पीड़ित होता है?

  1. जातक की कुंडली में जब चंद्रमा का शनि से संबंध होगा तो चंद्रमा पीड़ित हो जाएगा. ऐसा इस कारण होगा क्योंकि शनि दुख, वैराग्य, एकाकीपन, चिंता का कारक होता है.
  2. चंद्रमा का संबंध मंगल से होने पर भी मानसिक रोगों की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि मंगल उत्तेजना, क्रोध और ऊर्जा का कारक होता है और मन रूपी चंद्रमा पर इसका प्रभाव मानसिक स्थिति को अव्यवस्थित कर देता है.
  3. चंद्रमा पर केतु का प्रभाव होने पर भी मानसिक रोग होने की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं. केतु को ज्योतिष में मोक्षकारक ग्रह कहा गया है. भौतिकतावाद से दूर ले जाने वाला ग्रह भी केतु ही हैं, इसके साथ ही अवचेतन मन का कारक भी केतु होता है. लिहाजा जब केतु का प्रभाव चन्द्रमा पर होगा तो व्यक्ति के मन में सांसारिक मोह माया से विरक्ति आना शुरू हो जाती है.
  4. कुछ परिस्थितियों में राहु का प्रभाव चंद्रमा पर होने से भी मानसिक रोग होता है. क्योंकि राहु भी पाप ग्रह है और व्यक्ति को बहुत महत्वकांक्षी और उच्चाकांक्षी बनाता है. जब उसकी आकांक्षा पूर्ण नहीं होतीं तो मानसिक पीड़ा उत्पन्न करता है.
  5. जन्मपत्रिका में चंद्रमा के 8वें घर में होने और पाप ग्रहों की दृष्टि पड़ने पर भी चंद्रमा बेहद अशुभ फल देने के साथ व्यक्ति को मानसिक पीड़ा देता है.

उपर बताए गए ग्रहों से चंद्रमा का नीचे लिखे 4 प्रकार से संबंध बन सकता है-

  1. युति
  2. दृष्टि
  3. राशि
  4. नक्षत्र

शुभ फल पाने के लिए क्या उपाय करें?

  • चन्द्रमा को ज्योतिष में जल, पालन, पोषण, खाद्य पदार्थ का कारक माना गया है, इसलिये जितना संभव हो जातक को खाद्य सामग्री का दान करते रहना चाहिए. इसके साथ ही किसी भी जगह राहगीरों के लिए जल की सेवा (प्याऊ) लगाना चाहिए.
  • इसके साथ साथ ही प्रत्येक अमावस्या व पूर्णिमा पर भी दूध, चीनी, चावल का दान करना चाहिए.
  • इसके साथ ही यदि चन्द्रमा शनि से पीड़ित हो रहा हो तो शनि का दान जैसे सरसों का तेल, जूते, काली उड़द इत्यादि का दान किसी भी गरीब या बुजुर्ग व्यक्ति को करना चाहिए.
  • यदि चन्द्रमा मंगल से पीड़ित हो तो लाल मसूर, शहद, तंदूर की रोटी, जलेबी इत्यादि का दान भी करना चाहिए और समय-समय पर हनुमानजी का चोला भी चढ़ाना चाहिए.
  • यदि चन्द्रमा केतु से पीड़ित हो तो काले-सफेद तिल या इनसे बानी वस्तुओं का दान भी लाभकारी रहेगा. इसके साथ ही कुत्ते की सेवा भी श्रेयस्कर रहेगी.
  • यदि चंद्रमा राहु से पीड़ित हो तो जौ या जौ का आटा दान करें और मछली को मछुवारे से आजाद करा कर जल में मछली को प्रवाहित करें. मछली को आटे की गोली बनाकर खिलाएं.
  • कोढ़ी व्यक्ति को भोजन कराएं और मंदिर/ धर्म स्थान में सफाई की सेवा करें और सफाई से जुड़ी वस्तु जैसे झाड़ू, पोछा, डिटर्जेंट इत्यादि का दान करने से भी श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होगी.

         Satendra Yadav, News Desk