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Banswara News: शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर लोढ़ी काशी के नाम से विख्यात बांसवाड़ा जिले का अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शक्तिपीठ त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत केंद्र बना हुआ है. जिला मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर तलवाड़ा कस्बे के समीप उमराई गांव स्थित यह प्राचीन मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं बल्कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात सहित देशभर के भक्तों के लिए अटूट आस्था का प्रतीक है.
मां त्रिपुरा की अद्वितीय प्रतिमा
मंदिर में सिंह पर विराजित अष्टादश भुजा वाली विशाल श्यामवर्णा पाषाण प्रतिमा स्थापित है, जिसे श्रद्धालु त्रिपुरा सुन्दरी, तरतई माता और त्रिपुरा महालक्ष्मी के नाम से पूजते हैं. देवी प्रतिमा का दैनिक श्रृंगार इसकी विशेषता है जबकि रविवार को होने वाला पीला श्रृंगार भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहता है. प्रतिमा के चरणों में अंकित श्री यंत्र इस शक्तिपीठ को विशेष आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है.
ऐतिहासिक महत्ता
विक्रम संवत 1540 के शिलालेख के आधार पर माना जाता है कि यह मंदिर सम्राट कनिष्क के काल से भी पूर्व का है. प्रचलित मान्यता है कि प्राचीन काल में यहां गढ़पोली नामक महानगर था, जिसे दुर्गापुर कहा जाता था. त्रिपुरारी शब्द का उल्लेख दर्शाता है कि यहां तीन प्राचीन दुर्ग - शीतापुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी- स्थित थे, जिनके मध्य यह मंदिर बना और इसी कारण इसका नाम त्रिपुरा पड़ा.
नवरात्रि की भव्यता..
शारदीय नवरात्रि के पावन दिनों में यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान, शक्ति आराधना और भजन-संध्याओं और गरबो का आयोजन होता है. दूर-दूर से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के कारण मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो जाता है. यहां की सजावट, अलौकिक श्रृंगार और भक्तों की उमंग अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है.
नवरात्रि पर दर्शन का महत्व
मान्यता है कि शारदीय नवरात्रि के दौरान मां त्रिपुरा सुन्दरी के दर्शन करने से जीवन में समृद्धि, शांति और शक्ति का संचार होता है. इस अवसर पर मंदिर में सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और भक्तों की सुविधा के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं.
आस्था, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम
शारदीय नवरात्रि पर त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का भी प्रतीक है. यहां का वातावरण नवरात्रि के हर दिन भक्तों को देवी की दिव्य ऊर्जा का अनुभव कराता है.
नेताओं की बड़ी आस्था
माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर मे नेताओं की बड़ी आस्था है, इस मंदिर मे पीएम नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे तो कई बार यहां दर्शन करने आए थे, देश की पूर्व राष्ट्रपति,पूर्व उप राष्ट्रपति, कई राज्यों के राज्यपाल, राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत, डिप्टी सीएम दिया कुमारी, प्रेमचंद बैरवा, सहित कई केंद्रीय मंत्री और अधिकारी यहां दर्शन करने आ चुके है और माँ से अपनी मनोकामना मांगते है.
राजनीति यज्ञ
मां त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर मे राजनीति यज्ञ भी होता है, नवरात्री के अवसर पर कई बड़े बड़े नेता यहां राजनीती यज्ञ करा चुके है और मां के आशीर्वाद से अपना कॅरियर बना चुके हैं.
9 दिन होते हैं गरबे
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर 9 दिन रात को भव्य गरबे का आयोजन किया जाता है जिसमें हजारों की संख्या में जिले के लोग भाग लेते हैं और गरबा करते हुए नजर आते हैं.
तरताई मां के नाम से मशहूर
त्रिपुरा सुंदरी मां को तरतई माता के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यहां पर जो भी भक्त अपनी मनोकामना को पूरी करने के लिए आता है. मां से आशीर्वाद लेता है तो मां उसकी मनोकामना जल्द पूरी करती है,तुरंत फल देने वाली यह मां है इसलिए इसको तरतई माता भी कहा जाता है.
हर साल 5 किलोमीटर लंबी चुनरी चढ़ती है
मां त्रिपुरा सुंदरी के प्रति लोगों की आस्था इतनी है कि पिछले 4 साल से इंदौर और उसके आसपास के बड़ी संख्या में पांचाल समाज के लोग 5 किलोमीटर लंबी चुनरी मां को नवरात्रि के पहले दिन चढ़ाते हैं, यह पिछले 4 साल से बड़ी संख्या में मध्य प्रदेश के इंदौर से भक्त आते हैं और मां को चुनरी चढ़कर अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
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