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Rajasthan News: राजस्थान में एक तरफ सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों और आईईसी सामग्री पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्वप्रेरणा से जैविक खेती करने वाले किसानों को पुलिस और प्रशासन का सहयोग नहीं मिल रहा.
अंता उपखंड के डाबरी नक्कीजी गांव के किसान बंशीलाल नागर इसका जीता-जागता उदाहरण हैं, जो पिछले तीन वर्षों से बिना किसी रासायनिक उर्वरक के पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं.
बंशीलाल 50 बीघा जमीन पर जैविक विधि से गेहूं, चावल, चना जैसे अनाज उगाकर लोगों को जैविक उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं. लेकिन गांव के कुछ लोग आपसी दुश्मनी के चलते उन्हें परेशान कर रहे हैं.
बीते सप्ताह कुछ असामाजिक तत्वों ने उनकी 10 बीघा जमीन पर लगाए गए 4,000 जैविक पपीते के पेड़ों पर हानिकारक रसायन डालकर नष्ट कर दिए, जिससे किसान को लगभग 15 लाख रुपये का भारी नुकसान हुआ.
बंशीलाल ने इस घटना की शिकायत अंता थाने में दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. हताश होकर पीड़ित किसान ने जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर उचित कार्रवाई और न्याय की गुहार लगाई है. यह मामला न केवल जैविक खेती करने वाले किसानों की चुनौतियों को उजागर करता है, बल्कि प्रशासन की उदासीनता पर भी सवाल उठाता है.
सरकार के जैविक खेती को बढ़ावा देने के दावों के बीच ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की कमी किसानों का हौसला तोड़ रही है. बंशीलाल जैसे मेहनती किसानों को सहयोग और सुरक्षा मिलना जरूरी है, ताकि वे न केवल अपनी आजीविका चला सकें, बल्कि पर्यावरण और समाज के लिए भी योगदान दे सकें.
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