बाड़मेर: मना करने के बाद भी ग्रामीणों ने भीखीदेवी को 5वीं बार चुना सरपंच, जानें क्यों...

पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में लगातार निर्विरोध निर्वाचन का रिकॉर्ड बना रही भीखीदेवी इस बार भी ग्राम पंचायत वीरेन्द्रनगर की सरपंच चुनी गई हैं. 

बाड़मेर: मना करने के बाद भी ग्रामीणों ने भीखीदेवी को 5वीं बार चुना सरपंच, जानें क्यों...
भीखी देवी बायतु भीमजी से लगातार 5 बार निर्विरोध सरपंच चुनी गई.

भूपेश आचार्य/बाड़मेर: राजस्थान ने इन दिनों गांव की सरकार चुनने का दौर चल रहा है. कई गांवों में सरपंच निर्विरोध चुने जा चुके हैं तो कहीं चुनाव के बाद सरंपच चुने जा चुके हैं. इसी कड़ी में राजस्थान के किसानों नेता और कांग्रेस से गुड़ामलानी विधायक हेमाराम चौधरी की पत्नी छठी बार निर्विरोध चुना गया है. इस गांव की ग्राम पंचायत राजस्थान की सबसे बेहतरीन पंचायत में से एक है. यहां के लोग हर बार निर्वेरोध सरपंच चुनते हैं क्योंकि यहां पर भष्टाचार नहीं है. सड़क, बिजली, स्कूल, चिकित्सा हर सरकारी योजना का फायदा आम आदमी को मिलता है. 

पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में लगातार निर्विरोध निर्वाचन का रिकॉर्ड बना रही भीखीदेवी इस बार भी ग्राम पंचायत वीरेन्द्रनगर की सरपंच चुनी गई हैं. वह मौजूदा गुड़ामालानी विधायक हेमाराम चौधरी की पत्नी हैं. अपनी ग्राम पंचायत से भीखीदेवी के लगातार सरपंच चुने जाने का मुख्य आधार उनके पति हेमाराम चौधरी का प्रभाव के साथ हेमाराम चौधरी सरकार की हर योजना का लाभ अपने गांव को दिलाते हैं. साथ ही, अपनी सैलरी भी गांव के विकास में खर्च करते हैं. इस बार चौधरी ने मना कर दिया था. अब उम्र हो गई है, इस लिए सरपंच किसी और को चुना जाए लेकिन गांव की पंचायत ने फैसला किया कि इस बार भी हम भीखीदेवी को ही चुनेंगे. गांव वाले बताते हैं, जबसे भीखीदेवी को सरपंच चुना तब से जमकर विकास हुआ है. सबके बड़ी बात है कि सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिलता है.

हेमाराम चौधरी की पत्नी भीखी देवी बायतु भीमजी से लगातार 5 बार निर्विरोध सरपंच चुनी गई. इस बार पंचायत पुनर्गठन के दौरान ग्रामीणों ने पूर्व राजस्व मंत्री और गुड़ामालानी से विधायक हेमाराम चौधरी के एकलौते पुत्र स्वर्गीय वीरेंद्र चौधरी के नाम से बायतु भीमजी से अलग वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत गठित करवाई. वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत में भी भीखी देवी को ग्रामीणों ने निर्विरोध सरपंच चुना है. ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि ग्राम पंचायत में टांका निर्माण मनरेगा में मजदूरों के पैसे सीधे खाते में आते हैं.सभी ढाणियों तक बिजली व सड़क पहुंचाई है इसलिए हम इन्हें लगातार निर्विरोध सरपंच चुन रहे हैं.

हेमाराम चौधरी बताते हैं कि उन्होंने इस पर स्पष्ट मना कर दिया था कि वह अपनी पत्नी को सरपंर नहीं चुनना चाहते हैं. लेकिन गांव वाले फैसला कर दिया इसीलिए इस बार भी निर्विरोध चुनी गई. इस ग्राम पंचायत को गांव के लोग ही चलाते हैं. सारे विकास के काम गांव के लोग बड़े बुजुर्ग कमेटी बनाकर देखते हैं. सरकार की हर योजना का फायदा मिलता है. सरपंच भीखीदेवी बताती है कि उनकी हमेशा से ही अच्छा रही है कि मेरा गांव शिक्षा के मामले में आगे जाए. यहां पर हर सुविधा हो इसीलिए वह अपनी सैलरी भी यहीं पर खर्च कर लेती है. आज मेरी ग्राम पंचायत राजस्थान में सबसे बेहतरीन ग्राम पंचायतों में से एक है.

आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि सरपंच चुनाव में प्रत्याशी लाखों रुपए खर्च करता है और फिर जब योजनाएं आती है तो उसमें जमकर भ्रष्टाचार कर उन पैसों की वसूली करता है लेकिन इस ग्राम पंचायत में चुनाव में एक रुपया खर्च नहीं होता क्योंकि हमेशा निर्विरोध चुना जाता है लिया जा सारी सरकार की योजनाओं का पैसों का फायदा यहां के ग्रामीणों को मिलता है इसीलिए यहां के लोग बार-बार निर्विरोध सरपंच चुनना पसंद करते हैं