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बाड़मेर: पैसों के अभाव में घायल चुवक का इलाज हुआ बंद, परिजन सरकार से लगा रहे गुहार

नारायण 29 जून को अपने ससुराल सौभाला से घर आ रहा था. तभी रात को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी व नारायण बुरी तरह से घायल हो गया.

बाड़मेर: पैसों के अभाव में घायल चुवक का इलाज हुआ बंद, परिजन सरकार से लगा रहे गुहार
नारायण के सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उसे सांचोर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया.

गुड़ामालानी: बाड़मेर ज़िले के गुड़ामालानी पंचायत में धोलिनाड़ी गांव के निवासी युवक नारायण आज अपनी हालात को देखकर बेबस, लाचार और मजबूर हैं. 29 जून 2018 की रात धोलीनाडी निवासी नारायण के लिए मनहूस बन कर आई, जिसके बाद वह आज तक उठकर बैठ नहीं पाया. जिस घर में भविष्य के ताने बाने बुने जा रहे थे वहां आज बेबसी के चलते आंसुओं का दरिया बह रहा है. सब कुछ ठीक हो जाने की केवल उम्मीद ही बची है. 

खबर के मुताबिक नारायण 29 जून को अपने ससुराल सौभाला से घर आ रहा था. तभी रात को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी व नारायण बुरी तरह से घायल हो गया. हादसे में नारायण के सिर में गहरी चोट लगी और महिनों तक बेहोशी की हालत में रहा में अस्पताल में पड़ा रहा. पिछले एक साल से नारायण चारपाई पर अपनी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है. इलाज में लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया. 

मेहसाणा के लायंस हॉस्पिटल में कई महीनों तक इलाज चला लेकिन इसके बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हो पाया. अब नारायण अपने घर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है. सरकारी मदद के नाम पर नारायण को कुछ नही मिला. उसके पास कमाई का कोई अन्य जरिया नहीं है. हादसे से पहले मजदूरी कर परिवार का काम चला रहें नारायण ने भविष्य के लिए थोड़े बहुत पैसे जमा कर रखे थे लेकिन आज इलाज कराते-कराते उस पर लाखों रुपए का कर्ज चढ़ गया है. नारायण ही घर में कमाने वाला अकेला था. 

दरअसल, नारायण के सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उसे सांचोर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया. लेकिन ज्यादा गंभीर हालत होने के कारण उसे गुजरात रेफर कर दिया गया. गुजरात में तकरीबन 3 माह तक घायल नारायण का इलाज चला. चोट इतनी गम्भीर थी कि एक माह तक नारायण बेहोशी की हालत में रहा. एक माह बाद होश आया तो परिजनों को भी नारायण के जिंदा होने की आस बंधी. फिर 3 माह तक नारायण का इलाज चला. इलाज में 14 से 15 लाख रुपये खर्च कर दिए. 

वहीं नारायण के पिता ने अपने रिश्तेदारों व सेठ साहूकारों से कर्ज लेकर 15 लाख रुपये नारायण के इलाज के लिए खर्च कर दिए लेकिन अब भी बहुत पैसों की जरूरत थी लेकिन पैसों के अभाव में नारायण को आधा इलाज होने पर ही घर लाना पड़ा. आज उसी हालत में नारायण चारपाई पर मौत व जिंदगी की जंग लड़ रहा है. 55 वर्षीय पिता पर अब घायल नारायण के सार-संभाल करने की जिम्मेदारी व परिवार चलाने की जिम्मेदारी आ चुकी है क्योंकि घर पर कमाने वाला नारायण ही था जो मजदूरी कर अपना परिवार चला रहा है. पीड़ित नारायण के एक 5 साल की बेटी व 3 साल का बेटा है जो अपने परिवार की इस हालात को क्या समझ रहे होंगे लेकिन उसकी पत्नी पूरे दिन उसकी तरफ देखते देखते आंखों से आंसू टपकाती रहती है.

पीड़ित नारायण के पिता मोहनलाल का कहना है कि मैंने हॉस्पिटल में 15 लाख रुपये तक खर्च कर दिए लेकिन अब पैसों के अभाव में इलाज नहीं हो पा रहा है. अगर सरकार कुछ मदद कर इलाज करवाती है तो जरूर मेरा बेटा सही हो सकता है. अब उम्मीद है कि सरकार जरुर पीड़ित नारायण की मदद करेगी.