बाड़मेर: पंचों ने सुनाया तुगलकी फरमान, गांव से 3 अल्पसंख्यक परिवारों को निकाला

इन परिवारों का आरोप है कि हत्या के मामले में इनका एक सदस्य शामिल था, उसके बाद गांव पुलिस चौकी में पंचायत बुलाकर के फरमान सुना दिया कि आप को गांव से बाहर कर दिया जाता है.

बाड़मेर: पंचों ने सुनाया तुगलकी फरमान, गांव से 3 अल्पसंख्यक परिवारों को निकाला
गांव से 3 अल्पसंख्यक परिवारों को निकाला गया.

भूपेश आचार्य/बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर में एक नहीं तीन अल्पसंख्यक परिवारों को बिना कोई अपराध के गांव के पंचों ने सजा सुनाते हुए गांव से बहिष्कृत कर दिया. खबर के मुताबिक, तीन परिवार के 50 लोगों को गांव में आने नहीं दिया जाता है. जिससे चलते इस परिवार के लोग 2 महीने से बाड़मेर रह रहे थे. यहां तक कि परिवार का आरोप है कि गांव से बहिष्कृत होने के चलते सदमे से मां की जान चली गई.

इन परिवारों का आरोप है कि हत्या के मामले में इनका एक सदस्य शामिल था, उसके बाद गांव पुलिस चौकी में पंचायत बुलाकर के फरमान सुना दिया कि आप को गांव से बाहर कर दिया जाता है. 1 महीने से दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. सदमे में मां की जान चली गई है. पुलिस के पास जाने की हिम्मत इसलिए नहीं हुई क्योंकि गांव वालों ने साफ तौर पर कहा गया पुलिस के पास जाओगे तो आपकी जान को खतरा भी हो सकता है. लेकिन जैसे ही भी आरटीआई दलित सामाजिक कार्यकर्ता नहीं की आवाज उठाई और मीडिया की टीम पहुंची तो बाड़मेर एसपी को भी इस पूरे मामले की भनक लगी.

तभी पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी लोगों को गांव में भेज दिया और सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मी तैनात कर दिए. पूरे मामले की जांच अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक को दी थी, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आज भी इलाकों में गरीब परिवारों पर किस तरीके से दबंग लोग अपने फैसले थोपते हैं. परिवार के लोग कहते हैं कि एक का गुनाह है 50 लोग क्यों दुख दिया जा रहा है. सरकार इसमें हमारी मदद करे.

बता दें कि, दो तीन माह पहले हमारे परिवार के दो जनों को हत्या के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया. उसके कुछ दिन बाद गांव से गांवो के लोग रैली करके घर तक आये और डराया-धमाकाया और गांव से निकाल दिया. तब से हमारे तीन परिवार के करीब 50 सदस्यों को दर दर की ठोकरे खा रहे है. हमारे दूर की रिश्तेदार है उनके घर पर रुके हुए है. जैसे तैसे हमने दो तीन महीने निकाल दिए. अब हमारी सरकार से मांग है की दंड तो दो जनों ने किया लेकिन पूरे परिवार ने क्या बिगाड़ा है. हमे अपने गांव में रखा जाए यह ही हमारी मांग है.

वहीं, अब पीडित परिवार का कहना है कि हम तीन भाई है और एक ही गांव में एक ही जगह रहते है. बिशाला में मर्डर हुआ था, उस मर्डर में शकसोबह में हमारे परिवार के दो सदस्यों को फसाया गया. अगर अपराध किया है तो सजा वो भुगत रहे है. हमने, मां-बाप और बच्चों ने क्या बिगाड़ा है. हमने तो उनको कहा नहीं की मर्डर कर दो.