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Barmer News: कहते हैं न, रिश्तों का धागा कितना भी कमजोर क्यों न हो, अगर चाह हो तो उसे फिर से जोड़ा जा सकता है. बाड़मेर से आई एक खबर ने यह साबित कर दिया है कि न्याय सिर्फ सजा देने या मामलों का निपटान करने तक सीमित नहीं है बल्कि यह रिश्तों को जोड़ने और जीवन को नई दिशा देने की ताकत भी रखता है.
शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में एक ऐसा फैसला हुआ, जिसने न सिर्फ कोर्ट परिसर को भावुक कर दिया बल्कि समाज को भी रिश्तों की असली अहमियत का एहसास कराया.
रिश्ते में खटास आई
दरअसल, बाड़मेर निवासी चंपालाल और धनवंती की शादी वर्ष 2013 में बड़े धूमधाम से हुई थी. शुरुआती वर्षों में सबकुछ ठीक चला लेकिन कुछ पारिवारिक विवादों ने धीरे-धीरे उनके रिश्ते में खटास भर दी. हालात इतने बिगड़े कि दोनों अलग रहने लगे और दो साल पहले आपसी सहमति से तलाक की अर्जी भी अदालत में दाखिल कर दी.
फिर पिघले दिल
शनिवार को जब यह मामला लोक अदालत में पहुंचा तो अधिवक्ता गणेश कुमार मेघवाल ने दोनों पक्षों को बैठाकर लंबी बातचीत करवाई. समझाइश ने अपना असर दिखाया और दोनों के दिल फिर से एक-दूसरे के लिए पिघल गए.
अर्जी वापस लेने का फैसला कर लिया
भावुक माहौल के बीच चंपालाल और धनवंती ने तलाक की अर्जी वापस लेने का फैसला कर लिया और साथ मिलकर जीवन की नई शुरूआत करने का प्रण लिया. अदालत परिसर में ही दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर साथ रहने की सहमति जताई. इस नज़ारे को देखकर मौजूद हर कोई भावुक हो उठा. तालियों की गूंज और लोगों की मुस्कुराहट ने इस पल को और भी खास बना दिया.
इस फैसले से न सिर्फ एक घर टूटने से बचा बल्कि समाज को यह संदेश भी मिला कि बातचीत और धैर्य से हर विवाद का समाधान संभव है. एडवोकेट मेघवाल ने भी कहा कि यह मिसाल राष्ट्रीय लोक अदालत की सेंसिटिविटी को दर्शाती है.
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