ना क्लासरूम, ना छत… सड़क बनी स्कूल! बाड़मेर में सरकारी शिक्षा की शर्मनाक तस्वीर

Rajasthan News: बाड़मेर में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल के बच्चे भवन न होने से सड़क पर पढ़ने को मजबूर हैं. किराए और सामुदायिक भवन में बार-बार शिफ्टिंग से पढ़ाई बाधित हो रही है. दो साल से जमीन-भवन की फाइलें अटकी हैं.

ना क्लासरूम, ना छत… सड़क बनी स्कूल! बाड़मेर में सरकारी शिक्षा की शर्मनाक तस्वीर

Barmer News: राजस्थान के बाड़मेर जिले से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो कई सवाल खड़े करती है. महात्मा गांधी के नाम से संचालित राजकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल आज खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. हालात यह हैं कि स्कूल के पास न तो अपनी इमारत है और न ही स्थायी क्लासरूम. मजबूरी में बच्चे खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

यह राजकीय महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल अब तक वार्ड नंबर 1 में एक किराए की जर्जर इमारत में संचालित हो रहा था. भवन की हालत लगातार खराब होती जा रही थी, जिसके चलते मार्च महीने में उसे खाली करवा लिया गया. इसके बाद स्कूल को पास के एक सामुदायिक भवन में शिफ्ट किया गया, लेकिन वहां भी समस्या खत्म नहीं हुई. सामुदायिक भवन में अक्सर शादियां, सामाजिक कार्यक्रम और बैठकें होने लगीं. कई बार ऐसा हुआ कि क्लासरूम की जगह वहां टेंट, स्टेज और बर्तन नजर आए और बच्चों को बिना पढ़ाई किए वापस भेजना पड़ा.

गुरुवार को भी यही स्थिति देखने को मिली. सामुदायिक भवन में शादी की तैयारी चल रही थी और कक्षाओं के लिए कोई जगह नहीं थी. पढ़ाई बार-बार बाधित होने से अभिभावकों और शिक्षकों का सब्र टूट गया. बच्चों की पढ़ाई बचाने के लिए शिक्षकों ने सड़क पर ही कक्षा लगाना शुरू कर दिया. तेज धूप, धूल भरी हवा और ज़मीन पर बैठकर पढ़ते बच्चे सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों की सच्चाई खुद बयां कर रहे हैं.

Add Zee News as a Preferred Source

Trending Now

फिलहाल स्कूल के करीब 100 विद्यार्थियों और 7 शिक्षकों को वार्ड संख्या 54 स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के केवल दो कमरों में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया है. शिक्षक और बच्चे बताते हैं कि जहां भी जाते हैं, कुछ समय बाद वहां से भी हटने को कह दिया जाता है. सामुदायिक भवन में अब भी कार्यक्रम होते रहते हैं, इसलिए कई बार बाहर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है.

इस समस्या से परेशान होकर हाल ही में पूरे स्कूल के विद्यार्थी और उनके अभिभावक जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे. उन्होंने जिला कलेक्टर टीना डाबी और प्रशासन से स्कूल के लिए स्थायी भवन और जमीन की मांग रखी. अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग से लेकर पंचायत समिति और शिक्षा मंत्री तक फाइलें पहुंच चुकी हैं, लेकिन जिला स्तर पर कार्रवाई नहीं हो रही.

अभिभावक बताते हैं कि उनके बच्चे तीन से चार किलोमीटर दूर से पैदल स्कूल आते हैं, लेकिन वहां पहुंचकर कभी शादी, कभी बैठक तो कभी किसी और कार्यक्रम के कारण स्कूल बंद मिलता है. छोटे बच्चों को बार-बार वापस भेजना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है. दो साल से जमीन आवंटन की बातें हो रही हैं, मगर आज तक न जमीन मिली और न भवन बना.

स्थानीय लोगों के अनुसार, जमीन आवंटन की फाइल पिछले दो साल से अलग-अलग दफ्तरों में घूम रही है. शिक्षा मंत्री के निर्देश और प्रभारी मंत्री को जानकारी देने के बावजूद हालात नहीं बदले. परिणाम यह है कि महात्मा गांधी के नाम पर चल रहे इस इंग्लिश मीडियम स्कूल के बच्चे आज सड़क पर बैठकर पढ़ाई बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं. यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि सरकारी घोषणाओं और जमीनी हकीकत के बीच अब भी लंबा फासला है.

राजस्थान की ताज़ा ख़बरों के लिए ज़ी न्यूज़ से जुड़े रहें! यहां पढ़ें Rajasthan News और पाएं Barmer News हर पल की जानकारी. राजस्थान की हर खबर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार. जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!

ये भी पढ़ें-

Trending news