Rajasthani Recipe: कजरी तीज पर बनाएं मारवाड़ी सत्तू, स्वाद-सेहत की हैं फैक्ट्री!

Rajasthani Food Item: वैसे तो राजस्थान में खाने में कई चीजें प्रसिद्ध हैं लेकिन कजरी तीज के पर्व पर ज्यादातर घरों में मारवाड़ी सत्तू बनाए जाते हैं जो कि न केवल स्वाद में शानदार होते हैं बल्कि सेहत के लिहाज से भी काफी अच्छे माने जाते हैं. आज इसी के बारे में जानकारी बताएंगे.
 

Rajasthani Recipe: कजरी तीज पर बनाएं मारवाड़ी सत्तू, स्वाद-सेहत की हैं फैक्ट्री!
Image Credit: Rajasthani Food Item

Rajasthani Food Item: वैसे तो राजस्थान में खाने में कई चीजें प्रसिद्ध हैं लेकिन कजरी तीज के पर्व पर ज्यादातर घरों में मारवाड़ी सत्तू बनाए जाते हैं जो कि न केवल स्वाद में शानदार होते हैं बल्कि सेहत के लिहाज से भी काफी अच्छे माने जाते हैं. आज इसी के बारे में जानकारी बताएंगे.


मारवाड़ी सत्तू एक पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन है, जो मुख्य रूप से भुने हुए चने के आटे से बनाया जाता है. यह राजस्थान, विशेष रूप से मारवाड़ क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय है और इसे पौष्टिक, स्वादिष्ट और आसानी से तैयार होने वाला भोजन माना जाता है. सत्तू को आमतौर पर गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म परोसा जाता है, क्योंकि यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और आसानी से पच जाता है. मारवाड़ी सत्तू भुना हुआ चने का आटा (सत्तू), जो चने को भूनकर पीसकर बनाया जाता है.

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अन्य सामग्री (स्वाद के अनुसार): पानी या दूध (सत्तू घोलने के लिए)
चीनी, गुड़ या नमक (मीठा या नमकीन सत्तू के लिए)
घी (ऑप्शनल, स्वाद बढ़ाने के लिए)
मसाले (नमकीन सत्तू के लिए): जीरा पाउडर, काली मिर्च, अजवाइन, या मिर्च पाउडर
नींबू का रस (नमकीन सत्तू में, ताजगी के लिए)
कटे हुए प्याज, हरी मिर्च, या धनिया (नमकीन सत्तू में, ऑप्शनल)


मीठा सत्तू: सत्तू के आटे को एक कटोरे में लें. इसमें चीनी या गुड़ का पाउडर और थोड़ा सा घी मिलाएं. धीरे-धीरे पानी या दूध डालकर गाढ़ा या पतला घोल बनाएं, जैसी पसंद हो. अच्छे से मिलाकर तुरंत परोसें. इसे ठंडा या गर्म दोनों तरह से खाया जा सकता है.

नमकीन सत्तू: सत्तू में नमक, भुना जीरा पाउडर, काली मिर्च, और नींबू का रस मिलाएं. थोड़ा पानी डालकर घोल बनाएं या सूखा ही रखें (पसंद के अनुसार).
कटे हुए प्याज, हरी मिर्च, या धनिया से सजा सकते हैं. इसे ठंडा परोसना ज्यादा पसंद किया जाता है, खासकर गर्मियों में.

पौष्टिकता: सत्तू प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो इसे ऊर्जा का त्वरित स्रोत बनाता है. यह पाचन के लिए भी अच्छा है. गर्मियों में यह शरीर को ठंडक देता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है. इसे बनाने में समय और सामग्री की बहुत कम जरूरत होती है, जिसके कारण यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोकप्रिय है. सत्तू को मीठा, नमकीन, या मसालेदार बनाया जा सकता है, जो इसे हर उम्र के लोगों के लिए पसंदीदा बनाता है.


मारवाड़ी सत्तू राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से लोकप्रिय है, जहां इसे मजदूर, किसान और यात्रियों के लिए त्वरित और पौष्टिक भोजन के रूप में खाया जाता है. यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने के कारण रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा है. इसे अक्सर यात्रा के दौरान या लंबे समय तक भूख मिटाने के लिए ले जाया जाता है.

परोसने का तरीका: सत्तू को आमतौर पर घोल के रूप में (पेय के रूप में) या गाढ़ी लप्सी की तरह परोसा जाता है. मीठा सत्तू दूध के साथ और नमकीन सत्तू छाछ या पानी के साथ ज्यादा पसंद किया जाता है. इसे पराठे, पूरी, या सब्जी के साथ भी खाया जा सकता है.

सेहतमंद होते हैं

सत्तू में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण यह मांसपेशियों के विकास, पाचन और वजन नियंत्रण में मदद करता है. यह गर्मी से राहत देता है और शरीर को हाइड्रेट रखता है. मारवाड़ में सत्तू को कभी-कभी जौ या गेहूं के आटे के साथ मिलाकर भी बनाया जाता है, लेकिन चने का सत्तू सबसे प्रचलित है.

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Sandhya Yadav

Sandhya Yadav

संध्या यादव ज़ी राजस्थान न्यूज में सीनियर सब एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. वह राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हैं. इन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. करियर की शुरूआत इन्होंने डिजिटल मीडिया से की थी. 8 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. इससे पहले Newstrack और ETV Bharat में भी सेवाएं दे चुकी हैं. हेडलाइन, एडिटिंग और कंटेंट पैकेजिंग इनकी खासियत है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट पॉलिटिकल क्राइसिस और राजस्थान कोरोना क्राइसिस समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.