Dausa: प्राचीन काल से लग रहा मेला इस बार नहीं होगा आयोजित, जानिए क्यों

Dausa News: बारादरी मैदान में सैकड़ों वर्षो से बसंत पंचमी पर मेला आयोजित होता रहा है. लेकिन इस बार कोविड-19 के चलते मेले का आयोजन प्रशासन द्वारा नहीं किया गया.

Dausa: प्राचीन काल से लग रहा मेला इस बार नहीं होगा आयोजित, जानिए क्यों
प्राचीन काल से लग रहा मेला इस बार नहीं होगा आयोजित. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Dausa: मेले हमारी प्राचीन परंपरा है. राजा महाराजाओं के जमाने से मेला प्रथा चली आ रही है. जहां खुले मैदान में सैकड़ों दुकानदार अपनी दुकानें स्थापित करते हैं और वहां से दूरदराज से लोग पहुंच कर अपनी जरूरत का साल भर का सामान एक साथ खरीद कर ले जाते हैं. दौसा जिला मुख्यालय पर भी बारादरी मैदान में सैकड़ों वर्षो से बसंत पंचमी पर मेला आयोजित होता रहा है. लेकिन इस बार कोविड-19 के चलते मेले का आयोजन प्रशासन द्वारा नहीं किया गया.

बसंत पंचमी के मेले में प्रदेश से नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी दुकानदार यहां आकर अपनी दुकानें लगाते थे और लोग उनसे सामान खरीदते थे. बसंत पंचमी के मेले में खासकर लाल मिर्ची और मसाला बड़ी तादाद में बिकता था. यहां से लोग साल भर के मिर्च मसाले एक साथ खरीद कर ले जाते थे. लेकिन इस बार वह इस खरीदारी से महरूम रह गए.

ये भी पढ़ें-जयपुर साहित्य महोत्सव की आज से होगी ऑनलाइन शुरुआत, 300 वक्ता होंगे शामिल

 

दरअसल, दौसा जिला मुख्यालय पर राजा महाराजाओं के जमाने से बसंत पंचमी का मेला लगता रहा है. मेले की शुरुआत माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है, जिस दिन दौसा जिला मुख्यालय पर स्थित रघुनाथ जी के मंदिर से रथ में सवार होकर ठाकुर जी वन विहार के लिए बारादरी मैदान स्थित सीताराम मंदिर पहुंचते हैं.

ठाकुर जी को वन विहार के लिए रथ में सवार कर गाजे-बाजे के साथ लाया जाता है, जहां उनकी पूजा-अर्चना होती है और छट तक ठाकुर जी वही विराजते हैं. वहीं, छठ को सायंकाल ठाकुर जी को वापस गाजे बाजे के साथ लव मा जी के मंदिर पहुंचाया जाता है.

वहीं, सप्तमी को भगवान सूर्य को रथ में सवार कर मेला देखने वसंत विहार के लिए बारादरी मैदान लाया जाता है और सायंकाल वापस उन्हें उनके स्थान पर गाजे-बाजे के साथ पहुंचाया जाता है. दौसा के बारादरी मैदान में लगने वाले बसंत पंचमी के मेले में प्रदेश व अन्य राज्यों से सैकड़ों दुकानदार पहुंचते थे और जरूरतमंद लोग मेले में पहुंचकर सामानों की खरीदारी किया करते थे. लेकिन इस बार कोविड-19 के चलते प्रशासन ने बसंत पंचमी के मेले पर रोक लगा दी. जिसके चलते मेले से खरीददारी करने वाले लोग महरूम रह गए. वहीं, दुकानदारों की भी रोजी छिन गई.

ये भी पढ़ें-Rajasthan में पहली बार Postal Ballot से मतदान करेंगे दिव्यांग और वयोवृद्ध वोटर्स!

दौसा का बसंत पंचमी का मेला खासकर लाल मिर्च और मसालों की बिक्री को लेकर प्रसिद्ध है. लेकिन इस बार मेला नहीं लगने से मिर्च मसालों के खरीददार परेशान हैं. लोग साल भर का मिर्च मसाला बसंत पंचमी के मेले से ही खरीदते थे. इतिहास में राजा महाराजाओं के जमाने से लगने वाले बसंत पंचमी के मेले का कोविड-19 के चलते इस बार पहली बार ऐसा हुआ है जिसका आयोजन नहीं हो सका.

(इनपुट-लक्ष्मी अवतार शर्मा)