चुनावों से पहले नागौर में बावरी समाज ने की उन्हें को मौका देने की मांग!

कभी वोट बैंक का हवाला तो कभी पिछड़ापन तो कभी चुनाव में वोटर्स का मिसयूज कुछ एसे ही मुद्दों को लेकर इस बार नागौर जिले का चुनावी गणित वोटर्स के आंकड़ो में उलझता नजर आ रहा है. 

चुनावों से पहले नागौर में बावरी समाज ने की उन्हें को मौका देने की मांग!
प्रतीकात्मक तस्वीर

नागौर/ मनोज सोनी: प्रदेश की राजनीति का वह केंद्र जहां वक्त से पहले चुनावी कश्मकश शुरू हो जाती है. अपने अपने राजनीतिक वजूद को कायम रखने या यूं कहे अपनी अपनी वोट बैंक की गणित को राजनीतिक दलो तक अहसास कराने को लेकर शह ओर मात का खेल नागौर की राजनीति में कोई नया नहीं है बल्कि वर्षों पुराना है. जब देश की नागौर में पंचायत राज की व्यवस्था की शुरुआत हुई तो सिर्फ पंडित जवाहर लाल नेहरु के कहने से नागौर के लोगों ने दक्षिण भारत के नेता एसके डे को नागौर का सांसद बना दिया. 

उसके बाद नागौर की राजनीति अचानक पूरे देश के नक्शे पर तेजी से उभर कर सामने आइ. हमेशा से वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले जातिगत वोटर्स अब अपने राजनीतिक अस्तित्व को लेकर सभी राजनीति के दलों से समाज के लोगों को अपना प्रत्याशी बनाने की मांग कर रहे हैं. 

कभी वोट बैंक का हवाला तो कभी पिछड़ापन तो कभी चुनाव में वोटर्स का मिसयूज कुछ एसे ही मुद्दों को लेकर इस बार नागौर जिले का चुनावी गणित वोटर्स के आंकड़ो में उलझता नजर आ रहा है. एसे ही आंकड़ो की चुनावी गणित में अब नागौर जिले में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर जागृति महासम्मेलन का आयोजन होने लगा है. इसी चुनावी कश्मकश के बीच नागौर में अब बावरी समाज आर पार की लड़ाई का चुनावी एलान कर चुका है. प्रदेश के इतिहास में पहली बार अपने राजनीतिक वजूद की बात कर रहे बावरी समाज के लोगों ने सभी दलो से मांग कर बावरी समाज के लोगों को मोका देने की मांग की है. अचानक आए सामाजिक बदलाव की दिशा में समाज चाहे बावरी का हो या नायक समाज या फिर दूसरा कोई समाज. चुनाव के इस मोड़ में अब हर कोई अपनी साख को कायम करने में तुला हुआ है. 

चुनावी सरगर्मियों के बीच बावरी समाज की ताल निसंदेश कहीं न कहीं दोनों ही राजनीतिक दल, भाजपा का हो या फिर कांग्रेस का अपनी अपनी वोट बैंक के आधार पर चुनाव टिकटों की मांग शुरू कर दी है. औरर सितम्बर में नागौर में होने वाले देश के बड़े नेताओ के दौरे. नेता चाहे संघ के प्रमुख मोहन भागवत का हो या फिर सीएम वसुंधरा राजे का या फिर पूर्व सीएम अशोक गहलोत का हो या सचिन पायलट का सभी के सामने इस बार एक जुटता से समाज विशेष के लोगों को चुनावी शंखनाद करते नज़र आएंगे.