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राजस्थान: कोटा में बदला मुक्तिधाम का नजारा, चारों तरफ बिखरी है हरियाली

कब्रिस्तान का नाम सुनते ही जेहन में सबसे पहले बंजर जमीन पर उगे बबूल के पेड़ और और जगह-जगह उगी कटीली झाडिय़ों की तस्वीर बनती है. लेकिन कोटा में इस सोच को बदलने का बीड़ी युवा वर्ग ने उठाया है.

राजस्थान: कोटा में बदला मुक्तिधाम का नजारा, चारों तरफ बिखरी है हरियाली
यहां हर साल बारिश में पौधें रोंपे जाते है. (प्रतीकात्मक फोटो)

कोटा: कब्रिस्तान का नाम सुनते ही जेहन में सबसे पहले बंजर जमीन पर उगे बबूल के पेड़ और और जगह-जगह उगी कटीली झाडिय़ों की तस्वीर बनती है. सांगोद में कोटा रोड स्थित कब्रिस्तान पर आने वाले लोगों को भी पहले यहां कुछ ऐसी ही स्थिति नजर आती थी. लेकिन अब यहां कब्रिस्तान का पूरा मंजर बदला-बदला हुआ है. दिन में भी जहां लोगों को आने-जाने से डर महसूस होता था. पर आज यहां चारों ओर हरियाली बिखरी है.

इस दौरान यहां आने वाले लोगों को अलग-अलग किस्मों के पौधों पर महकतें फूलों को देखकर दिल-दिमाग को अलग ही सुकून मिलता है. अब स्थिति यह है कि यहां दिनभर कई लोग दो पल सुकून के लिए बिताने आते है.

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कोटा रोड स्थित उजाड़ नदी किनारे बना मुक्तिधाम दो साल पहले तक सुविधाओं की कमी से जूझ रहा था. बबूलों के पेड़ों से अटे परिसर में कटीली झाडियां और जंगली वनस्पति उगती थी. लोग दिन में भी यहां जाने से कतराते थे. कब्रिस्तान की बदहाली दूर करने के लिए युवाओं ने कमेटी बनाकर कब्रिस्तान की साफ-सफाई की और सैकड़ों पौधें रोंपे. 

परिसर में दो साल तक पौधों की नियमित सार संभाल के बाद यहां का नजारा बदला हुआ है. इसी का नतीजा है कि आज यहां चहुंओर हरियाली बिखरी है तो फूलों की खुश्बु लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है. कब्रिस्तान में सुबह शाम लोग घुमने आते है तो कई लोग यहां दरूद व फातिया पढते नजर आते हैं. अब भी यहां हर साल बारिश में बड़ी संख्या में पौधें रोंपे जाते है.