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भंवरी देवी मामला: CBI की अर्जी पर चली लंबी बहस, आदेश 9 सितंबर तक सुरक्षित

बुधवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई पुलिस अधीक्षक विनय कुमार व्यक्तिगत रूप से पेश हुए.

भंवरी देवी मामला: CBI की अर्जी पर चली लंबी बहस, आदेश 9 सितंबर तक सुरक्षित
बचाव पक्ष के वकील ने CBI का प्रार्थना पत्र निरस्त करने की मांग की. (प्रतीकात्मक फोटो)

भवानी भाटी, जोधपुर: बहुचर्चित एएनएम भंवरी देवी अपहरण व हत्या के मामले में बुधवार को अनुसूचित जाति जनजाति अदालत में नियमित सुनवाई हुई. पीठासीन अधिकारी अनिमा दाधिच के समक्ष सीबीआई के प्रार्थना पत्र पर लम्बी बहस के बाद आदेश नौ सितंबर तक सुरक्षित रखा है.

इस मामले में सीबीआई ने राजस्थान हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के लिए समय मांगा था. बुधवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई पुलिस अधीक्षक विनय कुमार व्यक्तिगत रूप से पेश हुए. इस दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि अमेरिका की एफबीआई की गवाह अम्बर बी कार अमेरिका से बाहर गवाही के लिए नहीं आ सकती है. उसकी विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही गवाही करवाई जा सकती है. 

बचावकर्ता के वकील ने रखा अपना पक्ष
बचावकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हेमन्त नाहटा से अपना पक्ष रखते हुए बताया कि इससे साफ जाहिर है कि सीबीआई केवल समय निकाल रही है षडयंत्र पूवर्क केवल ड्रामा कर रही है. साल 2017 से लेकर अब तक केवल समय पास कर रहे है. जबकि चालीस से अधिक पेशियां हो चुकी हैं. 

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कोर्ट ने प्रार्थना पत्र रखा सुरक्षित
वहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए छह बार ट्रायल कोर्ट व एक बार राजस्थान हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दी है. अब हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के लिए समय चाह रहे है. कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद प्रार्थना पत्र पर आदेश सुरक्षित रखा है.

बचाव पक्ष के वकील का यह था कहना
अधिवक्ता नाहटा ने यह भी कहा कि सीबीआई के प्रार्थना पत्र को निरस्त करते हुए बयान मुलजिम शुरू किये जाये. क्योंकि अभी तक 196 गवाहों की गवाही में उनके खिलाफ कुछ भी ठोस साक्ष्य नहीं है .