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राजस्थान में बढ़ी किसानों की मुश्किलें, 13 लाख अन्नदाताओं को लोन का इंतजार

अब तक प्रदेश में 2971 करोड़ का ऋण बंट पाया है, जबकि 7 हजार करोड़ से ज्यादा का ऋण बंटना बाकी है. वहीं, ऋण वितरण की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी

राजस्थान में बढ़ी किसानों की मुश्किलें, 13 लाख अन्नदाताओं को लोन का इंतजार
इससे पहले भी लोन को लेकर एक महीने का समय बढ़ाया गया था.

जयपुर: नाबार्ड द्वारा रियासती दर पर कर्ज देने से इंकार के बाद राजस्थान में किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. पहले ही तीन महीने देरी से ऋण बांटने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन सरकार के पास पैसो की कमी के चलते अब तक 10 हजार करोड़ में से केवल 3 हजार करोड़ का ऋण ही किसानों को मिल पाया है. ऐसे में अब लाखों किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई है.

वहीं, अपेक्स बैंक को रियायती दर पर नाबार्ड द्वारा पैसा देने के इंकार के बाद अब राजस्थान के किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. नाबार्ड ने केंद्र सरकार की ओर से बजट उपलब्ध नहीं करवाने का हवाला देते हुए रियासती दरों पर ब्याज देने से मना कर दिया. 

बता दें कि, अब तक प्रदेश में 2971 करोड़ का ऋण बंट पाया है, जबकि 7 हजार करोड़ से ज्यादा का ऋण बंटना बाकी है. वहीं, ऋण वितरण की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी. इससे पहले भी पैसा नहीं होने से एक महीना का समय बढ़ाया गया था. नाबार्ड द्वारा रियायती दर पर ब्याज नहीं देने से अब अपेक्स बैंक को इकोनॉमिक दर पर ब्याज देना पड़ रहा है. 

गौरतलब है कि, रियासती दर पर बैंक को नाबार्ड से 4.50 फीसदी ब्याज दर पर पैसा मिलता था, लेकिन अब 7.55 प्रतिशत की इकोनॉमिक दर पर ब्याज लेना पड़ रहा है. वहीं, अपेक्स बैंक ने हाल ही में 85 करोड़ का ऋण नाबार्ड से लेना पड़ा ता, जिसमें से 40 करोड़ इकोनॉमिक दर और 45 करोड़ रियासती दर पर लिया.

जबकि सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के मुताबिक ऋण वितरण की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी. इससे पहले भी पैसा नहीं होने से एक महीना का समय बढ़ाया गया था. यही वजह है कि अभी तक फसली ऋण के लिए आवेदन किए गए 21 लाख से ज्यादा किसानों में से अब तक सिर्फ 8 लाख किसानों को ही ऋण वितरित हुआ है. सबसे ज्यादा ऋण 2089 करोड रूपए जुलाई में वितरित हुआ था. लेकिन उसके बाद पैसों की कमी के चलते सहकारिता विभाग का ऋण वितरण अभियान सुस्त होता चला गया.

अगस्त में केवल 790 करोड़ और सितंबर में महज 121 करोड का ही ऋण बंट पाया. ऐसे में बाकी के 13 लाख किसानों को अभी भी ऋण वितरण होना बाकी है. वहीं, आने वाले दिनों में रबी के 6 हजार करोड़ का फसली ऋण भी बांटना है. ऐसे में सरकार के साथ साथकिसानों की मुश्किलें भी लगातार बढ़ती जाएगी.