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राजस्थान: शिक्षा माफिया की कठपुतली बना सरकारी तंत्र, कागजों पर चल रहे 250 ITI सेंटर

 जयपुर के सीतापुरा का विवेकानंद आईटीआई कॉलेज का नाम भी सरकारी दस्तावेजों में तो दर्ज है, लेकिन इस जगह फैक्ट्री संचालित हो रही है

राजस्थान: शिक्षा माफिया की कठपुतली बना सरकारी तंत्र, कागजों पर चल रहे 250 ITI सेंटर
राजस्थान में करीब 250 से ज्यादा आईटीआई सेंटर कागजों से बाहर ही नहीं निकल पाए है.

जयपुर: राजस्थान में स्किल डवलवमेंट के नाम से हो रहे करोड़ों के घोटालों हुआ है, जिसे सुनकर आपके पैरो तले जमीन खिसक जाएगी. हम, आपको उन आईटीआई कॉलेजों के बारे में बताने जा रहे हैं जो छात्रवृत्ति के नाम पर सरकार को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं. खबर के मुताबिक प्रदेश में आईटीआई सेंटर तो कई हैं लेकिन वो सिर्फ कागजों पर ही चल रहे हैं.

इसी कड़ी में जयपुर के सीतापुरा का विवेकानंद आईटीआई कॉलेज का नाम भी सामने आया. इसका नाम सरकारी दस्तावेजों में तो दर्ज है, लेकिन इस जगह फैक्ट्री संचालित हो रही है. सुनकर आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन इस तरह की तस्वीर राजस्थान के सभी जिलों में जी मीडिया की पड़ताल में सामने आई है. 

वहीं, जी मीडिया के साथ जब अफसरों ने भी इस जगह का मौका मुआयना किया तो उनकी भी आंखे फटी की फटी रह गई. फिर शुरू राजस्थान में आईटीआई कॉलेजों के छानबीन का दौर. फर्जी कॉलेजों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि आरएसएलडी के अफसरों को भी पसीना आ गया. सरकारी आकंडों के अनुसार राजस्थान में करीब 250 से ज्यादा आईटीआई सेंटर कागजों से बाहर ही नहीं निकल पाए है. जिन जगहों पर आईटीआई सेंटर का संचालन होना था, वहां निजी फैक्ट्रियां चल रही हैं

हालांकि सीतापुरा के फर्जी आईटीआई सेंटर के मकान मालिक का कहना है कि यहां पांच साल पहले आटीआई सेंटर चल रहा था, लेकिन अब बंद है. खबर के मुताबित जयपुर में 59, जोधपुर में 8, कोटा में 66, बीकानेर में 17, अजमेर में 35 और भरतपुर में 10 फर्जी सेंटर चल रहे हैं. 

वहीं, समित शर्मा, मैनेजिंग डायरेक्टर, आरएसएलडीसी के मुताबिक विभाग ने पूरे प्रदेशभर में अलग-अलग टीमे बनाकर आईटीआई सेंटर्स की पडताल करवाई, जहां सामने आया कि जिस जगह पर आईटीआई सेंटस कागजों में है, वहां फैक्टियां स्कूल संचालित हो रहे है, उनको नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है.

आईटीआई कॉलेज में युवाओं में हुनर तराशने के लिए सरकार करोड़ों रूपए का फंड देती है. लेकिन सवाल ये है कि इस फंड से किसका हुनर तराशा जा रहा है, ये अफसरों को भी नहीं पता. जब जी मीडिया ने पड़ताल की तो सामने आया कि जयपुर में आईटीआई कॉलेज में पंजीकृत बच्चों की संख्या तो कागजों में तो है, लेकिन जब उन्हे खंगाला गया तो एक भी बच्चा नहीं मिला.