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भरतपुर: गांव में पैंथर के घुसने से फैली दहशत, वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत कर पकड़ा

सुबह 6 बजे ग्रामीणों को इसका पता चला और सुबह 8 बजे बयाना वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. वहीं पैंथर को देखने के लिए लोग छतों पर जमा हो गए. 

भरतपुर: गांव में पैंथर के घुसने से फैली दहशत, वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत कर पकड़ा

देवेन्द्र सिंह, भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर के भुसावर थाने के गांव सलेमपुर कलां में आज एक जंगली जानवर के आने की दहशत से पूरा गांव लगभग 10 घंटे तक दहशत के साये में रहा. यह दहशत और डर तब और बढ़ गया जब पैंथर की दहाड़ से ग्रामीणों को पता चला कि गांव में जो जंगली जानवर घुसा है वह ओर कोई नहीं पैंथर है. 

पैंथर के घुसने से गांव में हड़कम्प मच गया. ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और वन विभाग की टीम को दी. जिस जगह से ग्रामीणों को पैंथर की दहाड़ सुनाई दे रही थी वो एक पत्थरनुमा घर था. जिसे आम बोल चाल की भाषा मे "पाटोर" कहते हैं. वह उसमें रखे इंधन के बीच जाकर वह बैठ गया था.

सुबह 6 बजे ग्रामीणों को इसका पता चला और सुबह 8 बजे बयाना वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. वहीं पैंथर को देखने के लिए लोग छतों पर जमा हो गए. भीड़ के शोर को सुनकर पैंथर जैसे ही दहाड़ता ग्रामीणों का डर वैसे ही बढ़ जाता. इस बीच वन विभाग बयाना और केवलादेव नेशनल पार्क से भी वन विभाग के अधिकारी और कार्मिक मौके पर पहुंचे. जिन्होंने पगमार्क के आधार पर यह सत्यापित कर दिया कि गांव की पाटोर में जो जंगली जानवर है वह पेंथर ही है.

देवता समझ रख दिए पकवान
गांव के जिस इलाके में यह पैंथर आकर छुप गया था उसे नाहरवार पट्टी कहते हैं. इस पर कुछ लोग हिम्मत करके नवरात्र में उसे देवी का चमत्कार समझ उसके लिए घरों में बने पकवान उस" पाटोर" के बाहर रख आए लेकिन तब भी वह बाहर नहीं निकला.

सवाई माधोपुर से आई टीम ने किया रेस्क्यू
इसके बाद इसको पकड़ने के लिए सवाई माधोपुर के रणथम्बोर से वन विभाग की रेस्क्यू टीम बुलाई गई. जो दोपहर 3 बजे बाद पहुंची. जिसने डेढ़ घंटे तक कड़ी मशकक्त के बाद ट्रेनक्यूलाईज कर उसको कबजे में लिया. इसको टीम सवाई माधोपुर लेकर जाएगी जहां उसको जंगल मे छोड़ दिया जाएगा. पकड़ा गया पैंथर पूरा वयस्क मेल पैंथर है.

इधर एसीएफ वाइल्ड लाइफ अभिषेक शर्मा का कहना है कि जिस इलाके में यह पैंथर मिला है. वहां पर जंगल में पहले भी पैंथर की साइटिंग हुई है. इस इलाके के पहाड़ी और जंगली क्षेत्र में पैंथर अपना ठिकाना बना लेते हैं और कई बार भोजन की तलाश में यह गांव में भी घुस जाते हैं. साथ ही उन्होंने कहा है कि केवलादेव नेशनल पार्क में एक साल पहले जो पैंथर आया था वह यह नहीं है. पार्क का पैंथर अभी भी पार्क में ही उसकी साइटिंग पार्क में हो रही है. दोनों पैंथर अलग-अलग हैं.

जंगल छोड़ मानव बस्ती की ओर बढ़ रहे है जानवर
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से रणथंबौर नेशनल पार्क में से चाहे टाइगर हो या पैंथर वह अपनी टेरिटरी छोड़ कर नई टेरिटरी की तलाश में भटक रहे हैं और कई बार यह गांव की तरफ रुख कर देते हैं. ऐसे में जब कभी इनका सामना मानव से होता है तो यह उस पर हमला भी कर देते हैं. इसके लिए वन और वाइल्ड लाइफ से जुड़े लोगों को सोचना होगा कि जानवर क्यों जंगल छोड़ रहे हैं या फिर जंगल भी इनके लिए सुरक्षित नहीं रहे हैं.