गांव की महिलाओं की बढे़गी इनकम, इस सरकारी योजना किराए पर मिल जाएंगे ट्रैक्टर और मशीन

Bharatpur News: राजस्थान के भरतपुर में राजीविका के महिलाओं को ट्रैक्टर कस्टम हायर सेंटर (CHC) परियोजना के तहत ट्रैक्टर दिए गए हैं, जिससे महिलाओं की इनकम बढे़गी. 

गांव की महिलाओं की बढे़गी इनकम, इस सरकारी योजना किराए पर मिल जाएंगे ट्रैक्टर और मशीन
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Bharatpur News: राजस्थान के भरतपुर कलेक्ट्रेट में राजीविका के महिलाओं को 6 ट्रैक्टर दिए गए. सभी ट्रैक्टर को कलेक्टर कमर चौधरी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह सभी ट्रैक्टर कस्टम हायर सेंटर (CHC) परियोजना भारत सरकार के कृषि किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से दिए गए हैं. इसका उद्देश्य आधुनिक कृषि यंत्र किसानों को किराए पर उपलब्ध करवाना है.

कलेक्टर कमर चौधरी ने बताया कि कस्टम हायर सेंटर योजना के अंतर्गत यह केंद्र और राज्य की जॉइंट योजना है. इसके अंतर्गत गांव-गांव में कस्टम हायर सेंटर खोले जाते हैं. इसका उद्देश्य है कि किसानों को गांव के लेबल पर कस्टम हायर सेंटर पर किराए पर मशीन मिल सकें, जिससे किसान ट्रैक्टर, रोटावेटर ले सकें. इससे किसानों को आसानी रहती है, जिन किसानों के पास खुद का ट्रैक्टर नहीं वह किसान कस्टम हायर सेंटर से किराए पर ले सकता है.

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हर ट्रैक्टर के लिए 7 लाख की सब्सिडी और 3 लाख का इन्वेस्टमेंट है. 7 लाख की सब्सिडी सरकार ने एडवांस में दी थी. 6 CLF को पहले फेज में ट्रैक्टर दिए गए हैं. इसका उद्देश्य राजीविका की महिलाओं की इनकम बढ़ सकें क्योंकि यह ट्रैक्टर किराए पर दिए जा सकेंगे. साथ ही किसानों को मशीन आसानी से किराए पर मिल सकें. आज उच्चैन, सेवर, कुम्हेर, भुसावर, बयाना, रूपवास CLF के लिए ट्रैक्टर दिए गए हैं.

कस्टम हायर सेंटर (CHC) परियोजना भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र किराए पर उपलब्ध करवाना है. यह योजना विशेष रूप से छोटे किसानों के लिए उपयोगी है. इस परियोजना में सरकार द्वारा 7 लाख की सब्सिडी दी जाती है और कलस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) द्वारा 3 लाख का निवेश किया जा रहा है. कृषि के मशीनों के लिए उसकी खरीद और मालिकाना हक पूरा CLF के पास रहेगा.

क्या है कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) परियोजना?
बता दें कि कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) परियोजना एक सरकारी पहल है. इसके तहत छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी और उपकरण किफायती दरों पर किराए पर उपलब्ध करवाए जाते हैं, जिससे कृषि के कामों में दक्षता बढ़ती है और महंगे उपकरण खरीदने की उनकी जरूरत खत्म होती है. यह योजना कृषि यांत्रिकीकरण के तहत चलाई जाती है और इसके संचालन का जिम्मा किसानों, FPO, सहकारी समितियों या निजी उद्यमियों के पास होता है.
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Sneha Aggarwal

Sneha Aggarwal

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
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