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भरतपुर: चरवाहे पर हुए बाघ हमले को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, रखी यह मांग...

ग्रामीणों में इस बात की सख्त नाराजगी है कि इतनी बड़ी धटना हो जाने के बाद भी वन विभाग का कोई अधिकारी गांव वालों से मिलने तक नहीं आया.

भरतपुर: चरवाहे पर हुए बाघ हमले को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, रखी यह मांग...
ग्रामीण वन विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने को लेकर अड़े हुए हैं.

सवाई माधोपुर: रणथंभौर नेशनल पार्क में टी 104 का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था की शनिवार की शाम खंडार क्षेत्र के फरिया गांव में जंगल से बाहर आये एक बाघ ने गांव के नजदीक बकरियां चरा रहे एक चरवाहे पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया. वहीं, इस मामले को लेकर ग्रामीण सड़कों पर उतर आए है.. 

खबर के मुताबिक, ग्रामीणों में इस बात की सख्त नाराजगी है कि इतनी बड़ी धटना हो जाने के बाद भी वन विभाग का कोई अधिकारी गांव वालों से मिलने तक नहीं आया. जिसे लेकर ग्रामीणों ने सवाई माधोपुर खंडार रोड पर जाम लगा दिया. जाम की सूचना पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा. पुलिस अधिकारी ग्रामीणों से जाम हटाने के लिए समझाइस करते रहे, मगर ग्रामीण वन विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने को लेकर अड़े हुए हैं.
 
ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद से लेकर अभी तक वन विभाग का कोई भी अधिकारी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने नही पहुंचा और ना ही अभी तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही या मृतक को मुवावजा देने की घोषणा की गई है. इसी मुद्दे पर सभी ग्रमीणों ने रोड जाम कर विरोध शुरू कर दिया है. 

tiger attack

गौरतलब है कि रणथंभौर में इंसानों पर बाघ के हमलों के मामलों में इजाफा हो रहा है. पिछले डेढ़ माह में बाघ के हमलों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है. इससे पहले टाईगर टी 104 ने कैलादेवी वन क्षेत्र में दो लोगों को अपना शिकार बना लिया था. इसके बाद शनिवार को एक अन्य बाघ ने फरिया में एक चरवाहे को मौत के घाट उतार दिया. वहीं, चरवाहे पर हमला करने वाले बाघ की अभी पहचान नहीं हो पाई है. मगर ऐसा कहा जा रहा है कि हमला करने वाला बाघ संभवतया टी 96 हो सकता है. 

ग्रामीणों के मुताबिक पिछले कुछ समय से टी 96 का फरिया इलाके में मूवमेंट बना हुआ है. जिसे लेकर ग्रामीणों द्वारा कई मर्तबा वन विभाग के अधिकारियों को अवगत भी कराया गया है. मगर विभागीय अधिकारियों द्वारा इस तरफ कोई ध्यान नही दिया गया. नतीजा ये हुआ की एक चरवाहा बाघ का शिकार बन गया. गौरतलब है कि रणथंभौर में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसके करण बाघों को पर्याप्त जगह नही मिल पा रही है,ऐसे में रणथंभोर में करीब 15 बाघ ऐसे है जिनका जंगल की सीमा के पास मूवमेंट रहता है. जिसके कारण कई बार इंसान बाघों के हमलों का शिकार हो जाते हैं.