सालों से बंद पड़ा 1100 करोड़ रुपये की लागत से बना धौलपुर कंबाइंड साइकिल पावर प्रोजेक्ट
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सालों से बंद पड़ा 1100 करोड़ रुपये की लागत से बना धौलपुर कंबाइंड साइकिल पावर प्रोजेक्ट

धौलपुर पावर स्टेशन का अब तक का स्वर्णिम काल वर्ष 2009-10 माना जाता है. पूरे देश में गैस से संचालित प्लांटों में से धौलपुर स्टेशन ने बिजली उत्पादन में दूसरा स्थान प्राप्त किया था. 

सालों से बंद पड़ा 1100 करोड़ रुपये की लागत से बना धौलपुर कंबाइंड साइकिल पावर प्रोजेक्ट

Dholpur: धौलपुर शहर के पास स्थापित धौलपुर कंबाइंड साइकिल पावर प्रोजेक्ट (Dholpur Combined Cycle Power Project) ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहा है. करीब 1100 करोड़ रुपये की लागत से बना गैस आधारित यह पावर प्रोजेक्ट मंहगी गैस के कारण कई वर्षों से लगभग बंद ही पड़ा है.

हालात यह है कि कोयला आधारित बिजली घरों में कोयले की कमी से आए संकट के समय में भी यह सरकार और लोगों की कोई मदद नहीं कर पा रहा है. एक ओर पूरा राज्य बिजली की कमी से परेशान है वहीं, धौलपुर का बंद पावर प्रोजेक्ट बिना उत्पादन के खड़ा है.

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गैस आधारित बिजली का उत्पादन महंगा होना इस प्लांट की बेकद्री का सबसे बड़ा कारण है. दरअसल, दुनियाभर में प्राकृतिक गैस के दाम बढऩे से गैस से बिजली बनाना महंगा सौदा हो गया है. वर्तमान में गैस से बिजली उत्पादन की लागत करीब 20 से 21 रुपये बैठती है. प्रतिस्पद्र्धा के दौर में कोई भी इतनी महंगी बिजली खरीदना वहन नहीं कर सकता. ऐसे में यह प्लांट बंद ही पड़ा है. 

गैस आपूर्ति नहीं होने का भी एक कारण
केन्द्र सरकार की पॉलिसी के अनुरूप पेट्रोलियम मंत्रालय तय करता है कि किस सेक्टर को कितनी गैस आपूर्ति की जानी चाहिए. इस क्षेत्र के जानकारों ने बताया कि देश के कृषि प्रधान होने के कारण मंत्रालय ने फर्टिलाइजर जैसे सेक्टरों को गैस वितरण के मामले में प्राथमिकता पर रखा है, जबकि विद्युत उत्पादन जैसे सेक्टर खिसक कर निचले पायदान पर आ गए हैं. इस कारण इन्हें इनकी मांग के अनुरूप गैस की आपूर्ति भी नहीं मिल पाती है.

प्लांट में हर माह आता लाखों का खर्च 
वर्तमान में बंद पड़े इस प्लांट की देखरेख और कर्मचारियों का वेतन आदि मिला कर हर महीने लाखों रुपये का खर्च होता है. वर्तमान में प्लांट में करीब 90 कर्मचारी और 200 से 250 संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं. प्लांट की नियमित देखरेख भी की जाती है. ऐसे में सरकार को हर माह करोड़ों रुपये का खर्च इन सब पर करना पड़ता है.
इस पर जानकारों का कहना है कि वर्ष 2007 में स्थापित यह संयंत्र तत्कालीन सरकार का अदूरदर्शी निर्णय था. प्राकृतिक गैस के संबंध में भारत विदेशों से आपूर्ति पर निर्भर है. ऐसे में गैस आधारित संयंत्र स्थापित करना एक अदूरदर्शी निर्णय था.

प्लांट की कुल क्षमता 
करीब 143 बीघा जमीन पर बने इस प्लांट में 110 मेगावाट की तीन उत्पादन यूनिट हैं, जिनसे प्रतिदिन 7.92 मिलियन यूनिट बिजली पैदा की जा सकती है. इससे एक माह में 500 यूनिट खर्च करने वाले 16 हजार घरों को रोशन किया जा सकता है.

अब तक प्लांट की उपलब्धियां रहीं 
धौलपुर पावर स्टेशन का अब तक का स्वर्णिम काल वर्ष 2009-10 माना जाता है. पूरे देश में गैस से संचालित प्लांटों में से धौलपुर स्टेशन ने बिजली उत्पादन में दूसरा स्थान प्राप्त किया था. इसके अलावा इस प्लांट को राजस्थान के बेस्ट पावर प्लांट के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है. साथ ही वर्ष 2014 व 2015 में इसने ऊर्जा बचत के क्षेत्र में सम्मान भी हासिल किए हैं. 

धौलपुर कंबाइंड साइकिल पावर प्रोजेक्ट चीफ इंजीनियर प्रेमराज बाकोलिया ने बताया कि संयंत्र पूरी तरह से तैयार है. सरकार के आदेश पर कभी भी विद्युत उत्पादन शुरू किया जा सकता है. गैस की कमी से संयंत्र लंबे समय तक बंद रहता है. शुरू किया जाए तो वर्तमान बिजली संकट में संयंत्र काम आ सकता है. 

Reporter- BHANU SHARMA 

 

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