भरतपुर:डाक्टरों के हत्थे चढ़ा सिलिकोसिस का फर्जी मरीज, मुआवजा लेने के जुगाड़ में था

 सिलिकोसिस बीमारी का फर्जी प्रमाणीकरण कराने के लिए एक व्यक्ति पहुंचा, कागजातों की जांच करने पर इसकी कारस्तानी चिकित्सकों की पकड़ में आ गई.

भरतपुर:डाक्टरों के हत्थे चढ़ा सिलिकोसिस का फर्जी मरीज, मुआवजा लेने के जुगाड़ में था
गिरफ्त में सिलकोसिस का फर्जी मरीज विजय

देेवेन्द्र सिंह,भरतपुर: शहर के जिला छह रोग अस्पताल में सिलिकोसिस बीमारी का फर्जी प्रमाणीकरण कराने के लिए एक व्यक्ति पहुंचा. कागजातों की जांच करने पर इसकी कारस्तानी चिकित्सकों की पकड़ में आ गई और डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ ने व्यक्ति को मौके पर ही पकड़ लिया. चिकित्सकों ने फर्जीवाड़ा करने की कोशिश करने वाले व्यक्ति को मथुरा गेट थाना पुलिस के हवाले कर दिया. साथ ही थाने में मामला दर्ज कराने के लिए लिखित शिकायत दी है.
सिलिकोसिस मरीज करा रहा था स्वस्थ व्यक्ति का फर्जी प्रमाणीकरण
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ हितेश कुमार बंसल ने बताया कि बुधवार को अस्पताल में सिलिकोसिस मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही थी. इस जांच के दौरान संदिग्ध सिलिकोसिस मरीजों को न्यूमोकोनियोसिस बोर्ड के समक्ष भेजा जाता है.बोर्ड उनकी जांच कर उनको सिलिकोसिस प्रमाणित करता है. लेकिन बुधवार को बोर्ड के समक्ष केदार सिंह का नाम से एक व्यक्ति सिलिकोसिस जांच कराने आया जब उसके कागजातों की गहनता से जांच की तो पता चला की केदार
के कागज लेकर विजय नाम का व्यक्ति स्क्रीनिंग कराने पहुंचा था दरअसल विजय नामक व्यक्ति खुद पहले से ही सिलिकोसिस मरीज के रूप में प्रमाणित था और वह केदार का फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण पत्र बनवाने के लिए स्क्रीनिंग
कराने पहुंचा था जिसको चिकित्सकों ने कागजातों की जांच के बाद मौके पर ही पकड़ लिया और मथुरा गेट पुलिस को सूचना कर पुलिस के हवाले कर दिया.
जाहिर है ये कोई पहला मामला नहीं है डॉ हितेश कुमार बंसल ने बताया कि हाल ही में 2 दिन पहले भी देवेंद्र  के कागजात लेकर पुरुषोत्तम नाम का एक शख्स स्क्रीनिंग कराने पहुंच गया था.कागजात जांच करने पर उसका फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया था लेकिन वह अस्पताल से भाग गया था.दोनों मामलों में सामने आया है कि सिलिकोसिस का फर्जी प्रमाणीकरण कराने के लिए दलाल आधार कार्ड और भामाशाह कार्ड में भी गड़बड़ी कर रहे हैं आधार और भामाशाह कार्ड में डाटा किसी अन्य नाम का भरा जाता है और फोटो किसी और का खिंचवाया जाता है इससे फिजिकल वेरिफिकेशन में सिलिकोसिस मरीज को भेजकर एक स्वस्थ व्यक्ति का भी फर्जी सिलिकोसिस प्रमाणीकरण हो जाता है.
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सिलिकोसिस मरीजों के उपचार और मौत के बाद उनके परिजनों को मुआवजा देने का प्रावधान कर रखा है. नियमानुसार सिलिकोसिस प्रमाणित होते ही सरकार की ओर से 3 लाख और मौत के बाद परिजनों को 2 लाख रुपए की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती है.