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भरतपुर: डांग में दो पक्षों के बीच जमीन कब्जे को लेकर पथराव और फायरिंग

भरतपुर जिले के डांग इलाके के पुलिस थाना गढ़ी बाजना में आज सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दो गांवो के लोग आमने-सामने हो गए. यही नहीं इस दौरान जमकर पथराव और फायरिंग हुई. 

भरतपुर: डांग में दो पक्षों के बीच जमीन कब्जे को लेकर पथराव और फायरिंग
इस बीच बयाना सर्किल के डीएसपी चेतराम सेवदा ने लोगों से समझाइश की.

देवेंद्र सिंह, भरतपुर: भरतपुर जिले के डांग इलाके के पुलिस थाना गढ़ी बाजना में आज सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दो गांवो के लोग आमने-सामने हो गए. यही नहीं इस दौरान जमकर पथराव और फायरिंग हुई. 

हालात यह हो गई कि दोनों गुटों को अलग करने के लिए पुलिस को हवाई फायर कर आंसू गैस के 10 से 12 सैल गोले छोड़ने पड़े तब जाकर भीड़ को तितर-बितर किया जा सका. जिस पर काबू पाने के लिए समूचे बयाना सर्किल की पुलिस का जाब्ता मोके पर इकट्ठा हुआ तब जाकर मामला कहीं शांत हुआ. पथराव में गढ़ी बाजना थाना प्रभारी कैलाश बैरवा खुद घायल हो गए. उनके हाथ मे चोट आई है. पुलिस ने स्थानीय जन प्रतिनिधियों व पंच -पटेलो की मदद से दोनों पक्षों को अलग कर शांति कराई. बयाना सर्किल के डीएसपी चेतराम सेवदा ने कई घण्टे तक समझाइश की.

जानिए इस विवाद का कारण
आपको बता दें कि भरतपुर के बयाना सर्किल के डांग इलाके के पुलिस थाना गढ़ी बाजना के गांव कोट में तांतपुर रोड़ पर वन विभाग की जमीन पर गांव झिरका के कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है. इस जमीन को ही गांव परोआं मन्नापुरा के कुछ लोग भी अपनी बताते हैं. जिसको लेकर दोनों पक्ष के लोगों में काफी लंबे समय से विवाद चल रहा है. दोनों ही धड़े सरकारी जमीन को अपनी बताकर अपनी -अपनी दावेदारी करते हुए आपस मे भिड़ गए. देखते ही-देखते मारपीट हुई लाठी -डंडे चले और पथराव शुरू हो गया. मामला यहीं नहीं रुका दोनों गांवों के लोग हथियारों से लैस होकर आमने-सामने हो गए और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई.

पुलिस बनी रही मुकदर्शक
यह पूरा वाकया पुलिस थाने से महज 500मीटर की दूरी पर ही घटित हो रहा था. लेकिन पुलिस मूक दर्शक बनी हुई थी. घटना की सूचना जब स्थानीय लोगों ने पुलिस के आला अफसरों को दी. तब जाकर थाना पुलिस हरकत में आई. लेकिन तब तक बात बहुत आगे बढ़ चुकी थी. इस बीच दोनों गुटों को अलग करने गए थाना प्रभारी कैलाश बैरवा भी पथराव में चोटिल हो गए. तब समूचे बयाना सर्किल के पुलिस जाब्ते को इकट्ठा किया गया. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हवाई फायर और आंसू गैस के 12 सैल से अधिक गोले छोड़ने पड़े तब जाकर भीड़ सहित दोनों गुटों को अलग किया जा सका. 

अधिकारियों ने की समझाइश
इस बीच बयाना सर्किल के डीएसपी चेतराम सेवदा ने लोगों से समझाइश की ओर इलाके के पंच पटेलों को बुलाकर समझाइश कराई तब मामला शांत हुआ. इसके बाद दोनों पक्षों के लोगों के साथ पुलिस थाने में मीटिंग हुई और झगड़ा नहीं करने के लिए पाबन्द किया गया. जमीन के टाइटल को लेकर वन विभाग के कर्मचारियों को भी मौके पर बुलाया गया. लेकिन घटना के सम्बंध में दोनों पक्षों की ओर से ना ही पुलिस की ओर से कोई भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है.

पुलिस ने क्यों नही लिया प्रिवेंटिव एक्शन?
इस पूरी घटना में अहम बात यह है कि जब किसी सरकारी जमीन पर कब्जे के लेकर लोग हिंसक हो रहे है तो वह विभाग जिसकी जमीन वह कोई कार्यवाही क्यों नही कर रहा है और दूसरा सवाल जमीन भी फॉरेस्ट की है उस पर कोई कैसे कब्जा कर सकता है. साथ ही पुलिस को जब इसकी पहले से जानकारी थी तो थाना प्रभारी ने प्रिवेंटिव एक्शन क्यों नहीं लिया? पुलिस थाने से 500 मीटर की दूरी पर लोग झगड़े और फिर हथियार लेकर आ जाएं फायरिंग करें तो क्या बदमाशो की तरह आमजन के जहन से भी खाकी का ख़ौफ़ समाप्त हो चुका है. पुलिस का जो इकबाल बुलन्द होना चाहिए वो इकबाल समाप्त हो गया है. यह आला अफसरों को जरूर सोचना होगा.