राजस्थान: हड़तालों ने थामी शहरों से लेकर गांव तक के जीवन की रफ्तार

मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ का दावा है कि 122 विभागों कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं. महापड़ाव पर डेरा डाले कर्मचारियों की भीड़ लगातार जुट रही है. प्रदेशभर से कर्मचारी दफ्तर छोड़कर जयपुर पहुंच रहे है.

राजस्थान: हड़तालों ने थामी शहरों से लेकर गांव तक के जीवन की रफ्तार

जयपुर/ आशीष चौहान: राजस्थान में चुनावी साल में आचार संहिता लागू होने से पहले कर्मचारी सगंठन सरकार पर दबाव बनाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं. एक तरफ गांव की सरकार हड़ताल पर चली गई, दूसरी ओर मंत्रालयिक कर्मचारियों ने जयपुर में महापड़ाव के साथ डेरा डाल लिया है. हजारों की तादात में कर्मचारी अपनी अपनी मांगों को लेकर मानसरोवर में एकजुट होकर नारेबाजी कर रहे है. दो दिन से प्रदेशभर के कर्मचारियों का खाना पीना, नहाना, धोना महापड़ाव में ही हो रहा है. 

मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ का दावा है कि 122 विभागों कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं. महापड़ाव पर डेरा डाले कर्मचारियों की भीड़ लगातार जुट रही है. प्रदेशभर से कर्मचारी दफ्तर छोड़कर जयपुर पहुंच रहे है. 9 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार आंदोलन में जुटे हुए हैं. वहीं पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारियों से सरकार के साथ 9 बार समझौता हुआ, लेकिन अभी तक आर्डस जारी नहीं हुए. इसके साथ ही ग्रेड पे 3600 करने, सचिवालय कर्मचारियों के समान वेत्तन भत्तों की मुख्य मांग है.

इससे पहले भी कई बार कर्मचारियों के आंदोलन हुए, लेकिन इस बार चुनाव नजदीक आते ही लगातार सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है. आचार सहिता की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है, वैसे वैसे कर्मचारी सरकार की धड़कने बढा रहे हैं क्योंकि सरकार में कर्मचारियों के हड़ताल में जाने के बाद कामकाज पूरी तरीके से प्रभावित हो गया है और आम लोगों का काम नहीं हो पा रहा.

कर्मचारी संगठन दावा ये कर रहा है कि 70 हजार से ज्यादा कर्मचारी छुट्टियो पर चले गए हैं और हड़ताल का पूरी तरह से समर्थन कर रहे है. मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष मनोज सक्सेना का कहना है "सरकार से कई बार वार्ता हुई, आंदोलन हुए लेकिन हर बार कोई समाधान नहीं निकला,इसलिए जाते जाते सरकार से हम यही मांग करते है कि समझौत के अनुसार हमारी मांगे मानी जाए,नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा."

वहीं दूसरी ओर गांव की सरकार भी पूरी तरह से हड़ताल पर चली गई है. बीडीओं, ग्राम विकास अधिकारी, पंचायत प्रसार अधिकारी से लेकर बाबू भी हडताल में है. पंचायतीराज सेवा परिषद और कर्मचारी संगठन से 9 बार सरकार के साथ समझौता हुआ, लेकिन अभी तक ऑडर्स जारी नहीं हुए. एलडीसी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कमलेश कुमार शर्मा का कहना है कि "सरकार समझौता पूरा नहीं कर सकती है तो हर बार समझौता क्यों किया जाता है. लगातार झूठे वादे कर सरकार हमारी भावनाओं के साथ खिलवाड कर रही है. गांव बंद आंदोलन से सरकार की सभी योजनाएं प्रभावित हो रही है."

गौरतलब है कि चुनावी साल में आमजन से जुड़ी योजनाओं का विकास कार्य प्रभावित होने से लोगों को परेशानी हो रही है.ऐसे में अब चुनावी साल यह देखना होगा कि हजारों कर्मचारियों को सरकार कैसे मना पाती है