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राजस्थान में बढ़ीं साइबर क्राइम की घटनाएं, फर्जी कॉल सेंटर बनाकर हो रही ठगी

पुलिस ने कार्ड क्लोनिंग और एटीएम ठगी की वारदातों का पर्दाफाश कर लोगों को जागरुक करना शुरु किया तो बदमाशों ने ठगी का नया तरीका ईजाद कर लिया है.

राजस्थान में बढ़ीं साइबर क्राइम की घटनाएं, फर्जी कॉल सेंटर बनाकर हो रही ठगी
अपराधी फर्जी काल सेंटर बनाकर अपराध की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं.

जयपुर: राजस्थान में ऑनलाइन ठगी की वारदातें बढ़ती ही जा रही है. शहर में रोजाना करीब आधा दर्जन मामले ऑनलाइन ठगी के दर्ज हो रहे हैं. ऑनलाइन ठगी की वारदातों के लिए जयपुर में 2 स्पेशल थाने खुल गए हैं इसके बावजूद साइबर ठगी की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है. अब तो अपराधियों ने साइबर ठगी का एक नया तरिका इजाद कर लिया है. अपराधी फर्जी काल सेंटर बनाकर अपराध की घटनाओं को अंजाम दे रहे है.

वैसे तो प्रदेश में पुलिस हाइटेक होती नजर आ रही है, लेकिन अपराधी तो एक कदम आगे चल रहे है. पुलिस ने कार्ड क्लोनिंग और एटीएम ठगी की वारदातों का पर्दाफाश कर लोगों को जागरुक करना शुरु किया तो बदमाशों ने ठगी का नया तरीका ईजाद कर लिया. अब बदमाश वेबसाइट की क्लोनिंग करके कॉलसेंटर चला रहे है. यानि कि आप किसी सहायता के लिए इंटरनेट पर कस्टमर केयर का नंबर सर्च करते है तो आपको वहां पर असली वेबसाइट से मिलती जुलती वेबसाइट नजर आती है. जिस पर कॉल सेंटर का नंबर लिखा होता है लेकिन वो नंबर असली नहीं होता है. उसके जरिए आपके साथ ठगी की जा सकती है. ऐसे ही कुछ मामले जयपुर में भी देखने को मिले हे जब साईबर ठगों ने लोगों को अपने जाल में फंसाया है.

खबर के मुताबिक, 20 जून को हरमाड़ा में मांगीलाल ने कैब बुक करवाई, जब कैब चालक ने ज्यादा किराया लिया तो उसने इंटरनेट पर कैब कंपनी के ऑनलाइन नंबर देखकर कस्टमर केयर पर कॉल किया. बाद में जिन नंबर पर कॉल किया गया उन्होंने राशि वापस देने का वादा किया, लेकिन झांसे में लेकर पीड़ित मांगीलाल के खाते से 58 हजार रुपये और गायब कर दिए. बाद में पता चला कि इंटरनेट पर देखे गए नंबर किसी कैब कंपनी के नहीं बल्कि फर्जी कॉल सेंटर के हैं.

ऐसे ही एक और मामले में जयपुर की जय जवान कॉलोनी निवासी तेजपाल सिंह ने 9 अगस्त को गूगल-पे से रुपए ट्रांसफर किए. लेकिन वो रुपए आगे ट्रांसफर नहीं हुए. बाद में कस्टमर केयर पर जब कॉल किया तो थोड़ी देर बाद कस्टमर केयर पर से मदद के लिए वापस कॉल आया और उन्होंने कुछ मैसेज भेजने को कहा. पीड़ित तेजपाल ने जब मैसेज फॉरवर्ड किए तो उसके खाते से 10 हजार रुपये निकल गए. क्योंकि मांगीलाल ने पहला कॉल इंटरनेट पर देखकर किया था जो कि फर्जी कस्टमर केयर का था.

जयपुर में 2 मामले ही नहीं बल्कि इस तरह के सैकड़ों मामले सामने आ गए, जब लोगों ने इंटरनेट के ऊपर देख कर मदद के लिए कस्टमर केयर पर कॉल किया था. लेकिन वास्तव में जो नंबर इंटरनेट पर देखे गए थे, वह फर्जी थे जिसके चलते सामने वाली फ्रॉड कंपनी ने लोगों को आसानी से ठग लिया और उनके खातों से लाखों रुपए गायब कर दिए. 

वहीं, ऐसे मामलों से बचने के लिए जयपुर के अपराध और साइबर थाना प्रभारी का कहना है कि गूगल या इंटरनेट के ऊपर देख कर किसी कंपनी के कस्टमर केयर को कॉल ना करें. उनकी ओर से दिए गए वास्तविक दस्तावेज देखकर ही कॉल करके अपने बारे में जानकारी दें. इसके अलावा किसी वेबसाइट पर दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल ना करें. टोल फ्री नंबर या फिर लैंडलाइन नंबर पर कॉल करें.

साइबर थाना प्रभारी का कहना है कि यह फर्जी कंपनियां किसी बड़ी वेबसाइट से मिलती हुई वेबसाइट बनाकर उसको सर्च इंजन पर ट्रेंड करवाते हैं. जिन्हें सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन करते हैं. जब कोई व्यक्ति गूगल जैसे सर्च इंजन पर किसी कंपनी के कॉल सेंटर्स या कस्टमर केयर की जानकारी लेता है तो इन फर्जी वेबसाइट्स के कांटेक्ट नंबर सबसे ऊपर आने लगते हैं. जिसके चलते व्यक्ति गुमराह होकर उन पर कॉल करता है, और ठगी का शिकार हो जाता है.

इस तरह की ठगी से बचने के लिए आप भी सावधान रहें और इंटरनेट पर बिना वेरीफाई हुए किसी नंबर पर सीधा संपर्क करके अपने बारे में जानकारी ना दें. आप खुद अपना बचाव करके इस तरह की ठगी की वारदातों से बच सकते हैं. सावधान रहें सुरक्षित रहें.