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जयपुर: छोटीकाशी में दिखी जनमाष्टमी की धूम, कान्हा के एक झलक के लिए उमड़ी भीड़

माखन चोर, नंदलाल के जनम की खुशी का रंग पूरे शहर में देखने को मिला. हर कोई कृष्ण जन्म के उल्लास में डूबा नजर आया.

जयपुर: छोटीकाशी में दिखी जनमाष्टमी की धूम, कान्हा के एक झलक के लिए उमड़ी भीड़
मंदिरों में ठाकुरजी को नई पोशाक धारण करवाकर अद्भुत शृंगार किया गया.

जयपुर: राजस्थान की छोटीकाशी में कान्हा के जन्मोत्सव का उल्लास छाया रहा. मंदिर-मंदिर और घर-घर उत्सवी माहौल रहा. शहर के आराध्य गोविंददेवजी मंदिर तडक़े मंगला झांकी से ही शहर गोविंद के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ा. मध्यरात्रि को जैसे ही कन्हैया का जन्म हुआ, आराध्य गोविंददेवजी सहित अन्य मंदिरों में कृष्ण जन्म की खुशियां छा गई. मंदिर-मंदिर बधाइयां गूंज उठीं. कृष्ण कृन्हैया के जन्माभिषेक झांकी के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं में होड़ सी मच गई.

जन्माष्टमी का पर्व छोटीकाशी में धूमधाम से मनाया गया. माखन चोर, नंदलाल के जनम की खुशी का रंग पूरे शहर में देखने को मिला. हर कोई कृष्ण जन्म के उल्लास में डूबा नजर आया. वहीं मंदिरों में ठाकुरजी को नई पोशाक धारण करवाकर अद्भुत शृंगार किया गया जिसके बाद मंदिरों में प्रभु दर्शनों के लिए सैलाब सा उमड़ा. भाद्रपद माह कृष्ण अष्टमी शनिवार को जन्माष्टमी के मौके पर छोटीकाशी अलसुबह से देर रात तक कृष्ण के रंग में रंगी नजर आई. वहीं शनिवार सुबह से ही भक्त शहर के आराध्य देव गोविंद देव जी मंदिर, राधा-दामोदर, गोपीनाथ, कृष्ण बलराम, इस्कॉन, आनंद कृष्ण बिहारी, ब्रज निधि, रामचंद्र जी, कनक वृंदावन मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भक्त प्रभु के दर्शनों के लिए पहुचंने लगे. 

शाम होते होते दर्शनों के लिए लंबी-लंबी कतारें नजर आई. रोहिणी नक्षत्र, अमृतसिद्धि, सवार्थसिद्धि योग में जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया. महिलाओं ने कान्हा के लिए माखन मिश्री सहित अनेक व्यंजन तैयार किए. इस बीच छोटे बच्चे राधा कृष्ण की पोशाक पहने मंदिरों में पहुंचें. वहीं भक्तों ने व्रत रखकर जन्मोत्सव की खुशियां मनाई. मध्यरात्रि में जन्माभिषेक और आरती कर भक्तों को पंजीरी और प्रसाद वितरित किया गया. गोविंद देव जी मंदिर में मंगला झांकी से भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. 

साथ ही रात को रंग बिरंगी रोशनी और आतिशबाजी के बीच आराध्य देव गोविंद देव जी मंदिर परिसर में मध्यरात्रि में 31 हवाई गर्जनाओं के साथ भगवान श्रीकृष्ण का प्राकटयोत्सव मनाया गया. महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक किया गया. साथ ही भक्तों में पंचामृत भी बांटा गया. दर्शनों के लिए बड़ी स्क्रीन भी लगाई गई. साथ ही 3000 से ज्यादा सेवकों ने व्यवस्थाओं को संभाला. 

वहीं सुरक्षा व्यवस्था भी एकदम चाक-चौबंद नजर आई. हालांकि शाम को मंदिरों में भक्तों को दर्शनों के लिए 30 मिनट तक लाइन में इंतजार करना पड़ा. उधर चौड़ा रास्ता स्थित राधा दामोदर मंदिर में महंत मलय गोस्वामी के सान्निध्य में दोपहर 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ. नाहरगढ़ पहाड़ी स्थित चरण मंदिर में दोपहर 12 बजे मंदिर महंत सुरेश कुमार पारीक के सान्निध्य में भगवान कृष्ण के चरण चिन्ह का वैदिक मंत्रोच्चार से अभिषेक हुआ. 

गोविंददेवजी के तडक़े 3.45 बजे पंचामृत अभिषेक करने बाद मंगला झांकी से दर्शन खुले. गोविंददेवजी को पीत पोशाक धारण करवाकर विशेष अलंकार धारण करवाए गए. विशेष फूलों का शृंगार किया गया. गोविंद के दर्शनों के लिए मंगला झांकी से ही लोगों की भीड़ उमडऩा शुरू हो गई, लोग दर्शन करते गए और आगे बढ़ते गए. यह सिलसिला मध्यरात्रि बाद जन्माभिषेक तक चलता रहा. जन्माभिषेक झांकी की एक झलक पाने को लोगों में होड़ सी मच गई. मध्यरात्रि 12 बजे 31 तोपों की गर्जनाओं के साथ गोविंददेवजी के दर्शन खुले तो 'राधे-राधे, जय हो कृष्ण कन्हाई की' जैसे जयघोष के साथ बधाइयां गूंज उठी. इससे पहले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा का पाठ हुए. मध्यरात्रि को 31 तोपों की गर्जनाओं और विशेष आतिशबाजी के साथ गोविंददेवजी के जन्माभिषेक दर्शन खुले. पांच पंडि़तों ने वेद पाठ करते हुए सालिगराम पूजन एवं पंचद्रव्यों के पूजन किया. इसके बाद मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने ठाकुरजी का पंचामृत अभिषेक शुरू किया. 425 लीटर दूध, 365 किलो दही, 11 किलो घी, 85 किलो बूरा व 11 किलो शहर से ठाकुरजी का अभिषेक किया गया. पंजीरी लड्डु और खीरसा के विशेष भोग भी अर्पित किया गया. 

बहरहाल, आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में रात 1.15 बजे तक चले जन्माभिषेक की झलक को लोग निहारते रहे. अभिषेक के बाद जयनिवास बाग के विशेष प्रसादी मंच से श्रद्धालुओं को नि:शुल्क पंचामृत प्रसादी का वितरण किया गया. इस बीच गोविंददेवजी मंदिर 'राधे-राधे, गोविंद जय-जय' के जयकारों से गूंजता रहा.