close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जयपुर: 6 साल बाद भी खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े सिर्फ 14 फीसदी लोग, जानें पूरा मामला...

बड़ी हैरानी की बात है कि सरकार और आला अधिकारियों की बैठकों में विभाग से जुड़े अफसर इन कम आंकड़ों को अलग ही रूप में पेश कर रहे हैं. 

जयपुर: 6 साल बाद भी खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़े सिर्फ 14 फीसदी लोग, जानें पूरा मामला...
रोज औसतन 200 से 250 लोग खाद्य सुरक्षा में नाम जुड़वाने के लिए आ रहे हैं.

जयपुर: राजस्थान में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना शुरू हुए छह साल का समय बीत चुका है. सरकारें बदल चुकी है, लेकिन जयपुर शहर में बीते छह साल में खाद्य सुरक्षा योजना से सिर्फ 14 फीसदी उपभोक्ता जुड़ पाए है. जिम्मेदार अफसर कहते हैं जयपुर शहर में सस्ता अनाज लेने को कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा. जबकि अफसरों की नाक के नीचे एकल विंडो पर खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने वालों की कतारें लंबी हैं.  सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी पात्र उपभोक्ताओं को उनके हक का निवाला नसीब नहीं हो रहा है.

गरीबों को मुफ्त गेहूं देने की योजना पर अफसर ही ग्रहण लगा रहे हैं.  प्रदेश की राजधानी में इसकी बानगी देखने को मिल रही है. जयपुर में खाद्य सुरक्षा योजना में गरीबों का नाम जुड़वाने में विभाग ही दिलचस्पी नहीं ले रहा है. राजधानी में आंकड़े इस बात की पुष्टि कर रहे हैं. शहर में महज 14 प्रतिशत लोग ही इस योजना से जुड़े हैं, जबकि लाभार्थियों का यह आंकड़ा 53 फीसदी होना चाहिए. 

इससे भी बड़ी हैरानी की बात है कि सरकार और आला अधिकारियों की बैठकों में विभाग से जुड़े अफसर इन कम आंकड़ों को अलग ही रूप में पेश कर रहे हैं. अफसरों का तर्क है कि शहर में लोग सस्ता अनाज लेने में दिलचस्पी नहीं ले रहे, लेकिन जिला कलक्ट्रेट में ही अफसरों के दावे की पोल खुल रही है. कलक्ट्रेट की एकल विंडो पर रोज औसतन 200 से 250 लोग खाद्य सुरक्षा योजना में नाम जुड़वाने के लिए आ रहे हैं. कई ऐसे भी हैं जिन्होंने दो महीने से या फिर छह महीने पहले आवेदन कर चुके, लेकिन जटिल प्रक्रिया के चलते उनका नाम नहीं जुड़ पा रहा है. जी मीडिया ने पड़ताल की तो ऐसे कई पीड़ित सामने आए, जो पात्र होने के बाद भी इस योजना से नहीं जुड़ पा रहे हैं.

वहीं, फरियादियों की समस्या का एक ही जगह समाधान करने के लिए एकल विंडो तो खोल रही है, लेकिन परिसर में विभाग की ओर से एक काउंटर तक नहीं बनाया गया है, जहां लोगों को प्रक्रिया समझाई जा सके, ऐसे में लोग आवेदन करने आ तो रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया में उलझ रहे हैं, आवेदन करने के बाद दस्तावेजों की कमी बताकर प्रक्रिया रोक दी जाती है, लोग महीनों चक्कर लगाते रहते हैं.

बहरहाल, राज्य सरकार चाहती है कि गरीबों को सस्ता अनाज मिले, लेकिन सरकारी अफसर गरीबों को मिलने वाले निवाले पर कुंडली मारकर बैठे हैं, सवाल यह भी है कि आखिर गरीबों के हक का निवाला कौन खा रहा है,