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करौली: पानी की समस्या से परेशान हैं लोग, प्रशासन से लेकर सरकार तक नहीं ले रहा कोई सुध

ढाणी से करीब तीन किलोमीटर दूर एक कुआं है, जहां तक पहुंचने का रास्ता भी दुर्गम है. कहीं पथरीला है तो कहीं ऊबड़-खाबड़ रास्ते को पार कर महिला-पुरुष कुएं तक पहुंचते हैं. 

करौली: पानी की समस्या से परेशान हैं लोग, प्रशासन से लेकर सरकार तक नहीं ले रहा कोई सुध
प्रतीकात्मक तस्वीर

करौली: मण्डरायल पंचायत समिति में राहिर पंचायत की ठेकला की झौंपड़ी का गांव पानी संकट से व्यथित हैं. उनके सूखे कंठों की पुकार प्रशासन द्वारा नहीं सुनने के कारण वहां टैंकरों से पानी नहीं पहुंच रहा और न जल संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं. ऐसे में पसीना बहाकर अपनी प्यास बुझाने के लिए तीन किलोमीटर दूर दुर्गम रास्ते से पानी लाने को मजबूर है.

डांग इलाके में बसी इस ढाणी में सड़क के अभाव में पहुंच पाना मुश्किल भरा है. करीब दस किलोमीटर तक ऊबड़-खाबड़ पथरीले रास्ते को पार करना पड़ता है. करीब पौने दो सौ की आबादी वाली इस ढाणी में यूं तो वर्ष भर जल संकट रहता है लेकिन भीषण गर्मी के दौर में ये विकराल रूप धरण कर लेता है. यहां टैंकरों से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है. भीषण गर्मी के दौर में यहां पेयजल संकट की स्थिति भयावह है. 

ढाणी से करीब तीन किलोमीटर दूर एक कुआं है, जहां तक पहुंचने का रास्ता भी दुर्गम है. कहीं पथरीला है तो कहीं ऊबड़-खाबड़ रास्ते को पार कर महिला-पुरुष कुएं तक पहुंचते हैं. सुबह-सुबह ही ग्रामीणों की कुएं पर भीड़ लग जाती है. जिनके पास ऊंटगाड़ी है, वे टंकी में पानी भरकर ले जाते हैं. पेयजल किल्लत के चलतें लोगों की दिनचर्या पानी लाने की जद्दोजहद के साथ शुरू होती हैं और उसी के साथ खत्म होती है. 

क्षेत्र की महिलाओं का कहना हैं कि उनका जीवन तो केवल पानी लाने ले जाने तक ही सिमट कर रह गया है. जिसके कारण लोगों को बड़ी कठिनाईयों में बसर करना पड़ रहा है. पानी की कमी से यहां रवी की फसल कर पाना सहज नहीं है. अच्छी बारिश होने पर ही खरीफ की फसल हो पाती है. ढाणी के पास ही एक तालाब है जो गर्मी में सूखा पड़ा है. 

ग्रामीणों का मानना है कि यह तालाब गहरा होकर इसकी पाल की ऊंचाई-चौड़ाई बढ़ जाए तो वर्ष भर उन्हें पेयजल संकट से भी निजात मिल सकत है. तालाब में पिछले वर्षों में मनरेगा और विधायक कोष से कार्य तो हुए, लेकिन खानापूर्ति अधिक की गई. ग्रामीणों का कहना है कि तालाब की ना तो गहराई पर्याप्त हुई और ना ही पाल की चौड़ाई. ऐसे में यहां पानी का पर्याप्त संचय नहीं हो पाता है. इलाके में जल संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही ग्राम गौरव संस्थान के सदस्यों ने ग्रामीणों को श्रमदान व सहयोग के लिए प्रेरित किया. इस पर सहमत हुए ग्रामीणों ने प्रति बीघा 2500 रुपए का आर्थिक सहयोग एकत्रित करने का निर्णय किया है.