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राजस्थान: दो जून की रोटी को मोहताज हुआ दौसा का एक परिवार, प्रशासन बेखबर

लालन-पालन करने वाली महिला कमलेशी को भी बिमारियों ने जकड़ा हुआ है, जिसके चलते वर्तमान में उसकी भी दशा दिनो दिन बिगड़ती जा रही है.

राजस्थान: दो जून की रोटी को मोहताज हुआ दौसा का एक परिवार, प्रशासन बेखबर
परिवार की मुखिया कमलेशी देवी भी बिमारी से पीडित हैं. (प्रतीकात्मक)

दौसा: प्रदेश की सरकार गरीबों का दुख दूर करने का दम भरती है और प्रदेश में कोई भूखा नहीं रहे इसके लिए सरकार ने कई योजनाए भी चला रखी है. लेकिन दौसा जिले के भाण्डारेज ग्राम पंचायत की पटवार वाली ढाणी का एक ऐसा परिवार हैं जो अब दो जून की रोटी को भी मोहताज है. परिवार के मुखिया की पांच साल पहले बीमारी के चलते मौत हो गई थी अब उस परिवार की स्थिति दयनीय हैं. आस-पास के लोगों की मदद से उनका गुजर बसर हो पा रहा हैं. पूरे परिवार की जिम्मेदारी कमलेशी पर है दो मजदूरी कर अपने बच्चों का जैसे-तैसे पेट पालने पर मजबूर है. 

हालांकि लालन-पालन करने वाली महिला कमलेशी को भी बिमारियों ने जकड़ा हुआ है, जिसके चलते वर्तमान में उसकी भी दशा दिनो दिन बिगड़ती जा रही है. खबर के मुातबिक पटवारी वाली ढाणी निवासी कालूराम सैनी की पांच साल पहले दमा व टीबी की बिमारी के चलते मौत हो गई थी. उसके पांच बच्चे है जिसमें से एक बच्ची की पिता ने ही शादी कर दी थी, लेकिन उसकी मौत के बाद जो हालत इस परिवार की बनी उसे देखकर हर किसी की आखों में आसू भर आते हैं.

वर्तमान मे इस परिवार के बच्चो व महिला कमलेशी बताया कि पडोसियों व रिश्तेदारों की मदद से खाने को मिल पा रहा है. कई बार तो ऐसी दशा भी होती हैं कि खाने को नहीं मिलता तो भूखे भी सो जाते हैं. वर्तमान में इस परिवार की मुखिया कमलेशी देवी भी बिमारी से पीडित हैं. जिसके चलते वो भी बेसुध सी ही रहती है और वह अपने नित्य कार्य भी करने में कई बार असाहय रहती है.

परिवार के सदस्यों से जब उनके बारे में पूछा गया तो एक शब्द बोलते ही उनकी आखों में आसू छलक गए. रोते रोते परिवार के सदस्यों ने अपना हाल बयां किया तो आस-पास खड़े लोगों की भी आखे आसू से भर आई. उन्होने बातया कि पांच साल पहले पापा ने जो दो कमरे बनाए थे उनके खिड़की-दरवाजे तो दूर प्लास्टर भी नहीं करवा पाए हैं. नीचे की छत भी कच्ची ही पड़ी थी घर के हाल भी बेहाल है.

वहीं पड़ोसी जीतू सैनी ने बातया कि स्थानीय स्तर पर ढाणी के लोगों द्वारा मदद की जाती है, लेकिन परिवार के गुजर बसर के लिए सरकारी योजनाओं का भी लाभ इन्हें मिलना चाहिए जो पांच साल में नहीं मिल पा रहा है. पहले दो साल तो इनको पालनहार योजना के तहत लाभ मिला था लेकिन एक साल से वह भी नहीं मिल पा रहा है. दूसरी ओर असाहय परिवार का नाम बीपीएल में भी नही है, ऐसे में सरकार की येाजनाओं का पूरा लाभ परिवार को मिले तो राहत मिल सकती है. जबकि जिले में हजारों लोग बीपीएल येाजना से जुड़े हुए है, लेकिन ऐसे जरूरतमन्द लोगों का बीपीएल में नाम नहीं जुड़ा होना भी इस व्यवस्था पर सवाल खडा करता है.