राजस्थान: सरकार की कोशिशों से बदली तालाबों की सूरत, बढ़ा वाटर लेवल

अभियान के पहले चरण में वर्ष 2016 में प्रदेश की 295 पंचायत समितियों के 3 हजार 529 गांवों का चयन किया गया था. 

राजस्थान: सरकार की कोशिशों से बदली तालाबों की सूरत, बढ़ा वाटर लेवल
अभियान के कारण अब भूजल स्तर में बढ़ोतरी से जल संकट भी दूर होने लगा है

कोटा: व्यर्थ बहते बारिश के पानी के संग्रहण एवं प्राचीन जलस्त्रोतों की दुर्दशा में सुधार के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाया जा रहा जल स्वावलम्बन अभियान कोटा जिले के कई गांवों के लिए वरदान साबित हो रहा है. अभियान में प्राचीन जलस्त्रोतों की सार संभाल एवं बरसाती पानी को रोकने के हुए उपायों से कई गांवों की स्थिति बदलने लगी है. एक ओर जहां ग्रामीणों को पीने का पर्याप्त पानी मिलने लगा है तो दूसरी ओर सूखे पड़े रहने वाले जलस्त्रोत भी अब पानी से लबालब भरे नजर आने लगे है.  

एक समय था जब प्रदेश के तालाब पानी के बिना सूख जाते थे. वहीं बारिश के मौसम में पानी ठहरने की व्यवस्थ ठीक न होने के कारण बारिश में इनमें पानी तो आता लेकिन व्यर्थ बह जाता था. दूर-दूर सूखे पड़े तालाब और घटते भूजल स्तर से साल दर साल गांवों में स्थिति भयावह होने लगी थी. लेकिन राज्य सरकार की ओर से शुरू किया गया जल स्वावलम्बन अभियान प्राचीन जलस्त्रोतों के लिए वरदान बना.

अभियान के पहले चरण में वर्ष 2016 में प्रदेश की 295 पंचायत समितियों के 3 हजार 529 गांवों का चयन किया गया था. इनमें कोटा जिले की मोईकलां व लटूरी पंचायत को शामिल कर करीब 3 करोड़ रुपए के कार्य करवाए गए. अभियान में चयनित गांवों में पारंपरिक जल संरक्षण के तरीकों जैसे तालाब, कुंड, बावडिय़ों, टांके आदि का मरम्मत कार्य एवं नई तकनीकों से एनिकट, टांके, मेढ़बंदी आदि का निर्माण किया गया. इन जल संरचनाओं के निकट पौधारोपण भी किया गया. 

जिसके कारण अब बारिश के जल की एक-एक बूंद को सहेज कर भूमि में समाहित करने की परिकल्पना अब साकार रूप लेने लगी है. अभियान में बनी जल संरचनाओं से लम्बे समय के लिए पानी जमा हुआ है और गांव पानी के मामले में अब आत्मनिर्भर बन गए हैं. अभियान में बारिश के पानी को बहने से रोकने से सतही स्त्रोतों में पानी जमा हुआ जिससे पानी का भूजल का स्तर भी बढ़ गया. साथ ही पानी के बहाव से मिट्टी की ऊपरी सतह के बहाव को रोका गया इससे मिट्टी की नमी बढ़ी जिससे खेती की पैदावार में बढ़ोतरी हुई.

अभियान से गांवों में जहां जलस्त्रोत पानी से लबालब भरे रहने लगे है वहीं भूजल स्तर में बढ़ोतरी से जल संकट भी दूर होने लगा है. इसका फायदा ग्रामीणों को इतना मिला की कभी बारिश के बाद खाली होने वाले तालाब अब गर्मी में भी लोगों की प्यास बुझा रहे है. बावडिय़ों का पानी भी रिचार्ज होने से इलाके में पानी की कमी अब लगभग दूर हो गई है.