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राजस्थान: पंचायतीराज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता खत्म करने से रुकेगा फर्जीवाड़ा!

गहलोत सरकार ने सत्ता में आते ही पिछली सरकार के फैसले को बदल दिया. अबकी बार पंचायतीराज चुनाव में फिर से उम्मीदवारों का पढ़ा लिखा होना जरूरी नहीं होगा.

राजस्थान: पंचायतीराज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता खत्म करने से रुकेगा फर्जीवाड़ा!
2015 वसुंधरा सरकार ने पंचायतीराज चुनावों में शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की थी.

जयपुर: वसुंधरा राज में गांव में पढ़ी-लिखी सरकार चुनने के लिए पंचायतीराज के नियमों में बदलाव कर शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की थी, लेकिन हुआ इसके बिल्कुल विपरित. दरअसल, फर्जी दस्तावेजों लगाकर गांव के जनप्रतिनिधि सरकार में आ बैठे. अब गहलोत सरकार इस बार के पंचायतीराज चुनाव में बिना शैक्षणिक योग्यता के चुनाव करवाने जा रही है.

बता दें कि, 2015 वसुंधरा सरकार ने पंचायतीराज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की थी, ताकि गांव की सरकार को पढ़ा-लिखा बनाया जाए सके. वहीं, वसुंधरा राज का ये दांव उल्टा पड़ गया. दरअसल, सैकडों जनप्रतिनिधि ऐसे निकले. जिन्होंने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज लगाकर चुनाव लड़ा और गांव की सरकार के मुखिया बन बैठे. 

वहीं, गहलोत सरकार ने सत्ता में आते ही पिछली सरकार के फैसले को बदल दिया. अबकी बार पंचायतीराज चुनाव में फिर से उम्मीदवारों का पढ़ा लिखा होना जरूरी नहीं होगा. शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता खत्म होने से अब फिर से उपचुनाव की संभावना नहीं बिल्कुल कम हो जाएगी. जिससे करोडों रूपए की बर्बादी भी नहीं होगी. फर्जीवाड़े के बाद राजस्थान में बहुत सी पंचायतों में उपचुनाव हुए थे, जिससे करोड़ों रूपए की बर्बादी हुई थी.

गांव की सरकार में सबसे ज्यादा 686 में से 634 शिकायते सरपंचों के नाम रही और अधिकतर सरपंच अपना कार्यकाल भी पूरा करने जा रहे है. जिसमें से सबसे ज्यादा फर्जी दस्तावेज लगाने की शिकायते अलवर से 55, दौसा से 48, जयपुर से 39, जालौर से 35, करौली से 31 भरतपुर से 27, नागौर से 26, जोधपुर से 25, झालावाड़ा से 22 थी. अब इन जनप्रतिनिधियों को सरकार ने पंचायतीराज चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहरा दिया है.