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राजस्थान: देवउठनी एकादशी पर कई श्रद्धालु पहुंचे अंजनी माता मंदिर, किए दर्शन

करौली में पांच नदियों के संगम के स्थल पांचना बांध के पास पहाडी पर स्थित सुप्रसिद्ध माता अंजनी का मंदिर राजस्थान का इकलौता मंदिर माना जाता है. 

राजस्थान: देवउठनी एकादशी पर कई श्रद्धालु पहुंचे अंजनी माता मंदिर, किए दर्शन
मेले में लकड़ी के खिलौने और देहाती सौंदर्य प्रसाधन की दुकानें भी सजती है.

आशीष चतुर्वेदी, करौली: अंजनी माता मंदिर पर देवउठनी एकादशी के मौके पर आयोजित मेले में हजारो श्रद्धालुओं ने माता के दरवबार में ढोक लगाई और खुशहाली की मन्नत मांगी. हजारों श्रद्धालु अंजनी माता के जयकारे लगाते ऊंची पहाड़ी पर पहुंचे. जहां अंजनी माता के दर्शन और पूजा अर्चना कर के खुशहाली की मन्नत मांगी. मन्दिर में बाल हनुमान को गोद में लेकर बैठी माता अंजनी के दर्शन होते हैं. 

मन्दिर में विशेष तौर पर कान की बीमारियों से पीड़ित लोग सरकंडे का तीर चढ़ा कर मन्नत मांगते हैं. कहा जाता है कि कलयुग में एक मात्र सिद्ध देव कोई है तो वो है केसरी नंदन हनुमान. ऐसे देव जिनके नाममात्र से भूत पिशाच दूर भाग जाते हैं और मन भय मुक्त हो जाता है. ऐसे महाबली हनुमान मंदिर देशभर में गली गली मिल जाते हैं. जो जन-जन की भक्ति और आस्था के प्रतिक हैं. लेकिन हम आपको हनुमान जी के ऐसे स्वरूप के दर्शन करा रहे हैं, जिनकी मासूम सी छवि पर आप भी मोहित हो जायेंगे. 

हम आपको लेकर चल रहे हैं करौली के अंजनी माता के मंदिर में जहां महाबली हनुमान माता अंजनी की गोद में बाल रूप में विराजमान हैं. अंजनी माता मंदिर के पहाड़ के नीचे पाताली हनुमान का मंदिर है. मान्यता है कि ये जमीन से निकले हैं. इस कारण इनका नाम पाताली हनुमान मंदिर पड़ा है.

करौली में पांच नदियों के संगम के स्थल पांचना बांध के पास पहाडी पर स्थित सुप्रसिद्ध माता अंजनी का मंदिर राजस्थान का इकलौता मंदिर माना जाता है. जिसकी स्थापना संवत 1202 ईस्वी में हुई थी. आकर्षक प्राकृतिक परिवेश में स्थित मंदिर काफी विख्यात है. यहां श्रद्धालु दूर दूर से अपनी अराध्या देवी अंजनी माता के दर्शन करने व मन्नती मांगने आते हैं. अंजनी माता यदुवंश की जादौन शाखा की कुलदेवी मानी जाती है. इस मंदिर की स्थापना यदुवंशी करीब 1202 ईस्वी में अर्जुनदेव ने की थी. अंजनी माता मंदिर पर हर वर्ष देवउठनी एकादशी पर मेला आयोजित होता है. मेले में हजारों श्रद्धालु भाग लेते है.

हजारों श्रद्धालु अंजनी माता के जयकारे लगाते ऊंची पहाड़ी पर पहुंचते है. जहां अंजनी माता के दर्शन और पूजा अर्चना कर के खुशहाली की मनौती मांगते है. मन्दिर में विशेष तौर पर कान की बीमारियों से पीड़ितो का उपचार होता है. मान्यता हैं कि माता का नाम लेने मात्र से कान का रोग ठीक हो जाता है. कान का रोग ठीक होने पर लोग सरकंडे का तीर चढ़ा कर मन्नती मांगते हैं. मेले में लकड़ी के खिलौने और देहाती सौंदर्य प्रसाधन की दुकानें भी सजती है. ग्राम पंचायत की ओर से कुश्ती दंगल का भी आयोजन किया जाता है. मेले में क्षेत्रीय पहलवानों के अलावा भरतपुर, धौलपुर जिलों के पहलवान दांव पेंच दिखाते है। श्रृ़द्धालूओ की भारी भीड़ के चलते अंजनी मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रही। शन्ति व सुरक्षा व्यवस्था के लिए जगह-जगह पर पुलिस जाप्ता भी तैनात किया गया.