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Bharatpur News: भरतपुर जिला कलेक्ट्रेट से रोजाना कई आदेश जारी होते हैं. खस्ताहाल बिल्डिंग्स की पहचान करो, उन्हें खाली करवाओ, नोटिस चिपकाओ और ज़रूरत पड़ी तो सील भी करो. लेकिन सवाल ये है कि जिन ऑफिसों से ये आदेश जारी हो रहे हैं, उनकी अपनी हालत क्या है? तस्वीरें चौंकाने वाली हैं और सवाल भी.
जिला कलेक्ट्रेट खुद एक जर्जर इमारत
दरअसल, भरतपुर का जिला कलेक्ट्रेट खुद एक जर्जर इमारत बन चुका है. बरसात के इन दिनों में कलेक्ट्रेट की छत से लगातार पानी टपक रहा है. जहां से आदेश तैयार होते हैं, वहां फाइलों को पानी से भीगने से बचाया जा रहा है? कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों का कहना है कि हर साल बरसात में यही स्थिति होती है. दीवारों से पानी रिसता है, छतें टपकती हैं, और इलेक्ट्रिक वायरिंग तक गीली हो जाती है.
जर्जर इमारत में बैठकर अफसर करते हैं दस्तखत
अफसर खुद टपकते पानी के नीचे बैठकर जर्जर इमारतों को 'खतरनाक' घोषित करने के आदेश पर दस्तखत कर रहे हैं. एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा हम रोज डर के बीच से गुजरते हैं, ऊपर छत टपकती है, नीचे फर्श फिसलन भरी हो जाती है. बाहर की इमारतों का सर्वे हो रहा है, लेकिन खुद की बिल्डिंग को जैसे नजरअंदाज किया जा रहा है.
सिस्टम की हालात पर खड़े हो रहे हैं सवाल
जिस बिल्डिंग को कंट्रोल रूम कहा जाता है, जहां से जिले भर की मॉनिटरिंग होती है, वही अब खुद से कंट्रोल खोती दिख रही है. छत से लगातार पानी टपकना सिर्फ इमारत की नहीं, बल्कि सिस्टम की भी हालत को बयां करता है. सवाल ये है कि क्या प्रशासन अपनी इमारत को भी खतरनाक बिल्डिंगों की सूची में डालेगा?
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