Sawai Madhopur: मरम्मत के बाद पहली बारिश में ही ढह गया पुल! MP और 5 जिलों से टूटा सवाई माधोपुर का संपर्क

Rajasthan News: सवाई माधोपुर की बोदल की उगाड़ पुलिया मरम्मत के बाद पहली बारिश में ही टूट गई, जिससे जिले का सीधा संपर्क एमपी और 5 बड़े जिलों से कट गया. पुलिया टूटने से एनएचएआई की घटिया निर्माण गुणवत्ता की पोल खुल गई.

Sawai Madhopur: मरम्मत के बाद पहली बारिश में ही ढह गया पुल! MP और 5 जिलों से टूटा सवाई माधोपुर का संपर्क
Image Credit: Sawai Madhopur News

Rajasthan News: सवाई माधोपुर जिले के खंडार क्षेत्र में बोदल की उगाड़ पुलिया एक बार फिर से बड़ी लापरवाही की भेंट चढ़ गई है. हाल ही में मरम्मत पूरी होने के बाद पुलिया से हैवी वाहनों का आवागमन शुरू किया गया था, लेकिन पहली ही तेज बारिश में पुलिया ध्वस्त हो गई. इसके बाद सवाई माधोपुर का मध्य प्रदेश के 10 बड़े शहरों और राजस्थान के 5 जिलों से संपर्क पूरी तरह कट गया है. पानी के तेज बहाव ने पुलिया पर किये गए NHAI द्वारा घटिया निर्माण की कलई खोल कर रख दी.

आपको बता दें कि हाल में बोदल गांव के समीप मानसरोवर बांध की उगाड़ पुलिया का 18 दिनों तक मरम्मत कार्य चला था. उसके बाद 18 अगस्त को मेजरमेंट एक्सपर्ट की जांच के बाद हैवी वाहनों का आवागमन शुरू किया गया. लेकिन गुरुवार रात को हुई तेज बारिश और मानसरोवर बांध से छोड़े गए पानी के तेज बहाव ने पुलिया की पोल खोल दी. पुलिया पहली ही बारिश का दबाव नहीं झेल पाई और देखते ही देखते टूट गई. गनीमत रही कि उस दौरान पुलिया से कोई हैवी वाहन नहीं गुजर रहा था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था. पुलिया टूटने से मध्यप्रदेश के श्योपुर, उज्जैन, रतलाम, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, शिवपुरी समेत 10 जिलों और राजस्थान के कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ और करौली जिलों का संपर्क टूट गया है. इस मार्ग पर रोजाना 100 से अधिक बसें, 2 हजार ट्रक, 8 हजार कार और करीब 15 हजार बाइक गुजरती थी.

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इधर, स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी ने पुलिया मरम्मत में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया. ग्रामीणों का कहना है कि सीमेंटेड गिट्टी की जगह पीली मिट्टी का भराव किया गया और ठेका भी किसी अपंजीकृत ठेकेदार को सौंपा गया. पुलिया टूटने से आसपास के गांवों के लोग दीवार के सहारे पैदल और बाइक से निकलते नजर आए. मौके पर प्रशासन की गैरहाजिरी को लेकर भी सवाल उठे. सबसे बड़ी परेशानी उन 200 से अधिक छात्रों को झेलनी पड़ी, जिन्हें एमएससी और डीएलएड की परीक्षा देनी थी. पुलिया टूटने से वे परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाए। परीक्षार्थियों ने सरकार से दोबारा परीक्षा करवाने की मांग की है.

दरअसल, 30 जुलाई को भी यही पुलिया टूटी थी और उसके बाद मरम्मत का कार्य किया गया. लेकिन पहली ही बरसात में पुलिया टूटने से विभाग पर सवाल खड़े हो गए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि यह प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है. वहीं एनएचएआई अधिकारी आशु गर्ग ने सफाई देते हुए कहा कि इस बार पानी का वेग सामान्य से ज्यादा था. मरम्मत कोई स्थायी समाधान नहीं है. स्थायी समाधान केवल फ्लाईओवर निर्माण से ही संभव होगा.

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