Bhilwara: Mahi Goswami को नहीं तोड़ पाई ससुराल की प्रताड़नाएं, बनी समाज के लिए मिसाल

भीलवाड़ा (Bhilwara) ज़िले की रहने वाली माही को कल तक कोई नहीं जानता था, लेकिन आज हर कोई उनके बारे में जानना चाह रहा है. 

Bhilwara: Mahi Goswami को नहीं तोड़ पाई ससुराल की प्रताड़नाएं, बनी समाज के लिए मिसाल
माही ने बचपन से ही पैसों की तंगी देखी है.

Bhilwara: "तू ख़ुद की खोज पर निकल, तू किसलिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की समय को भी तलाश है" ये लाइनें मिसेज इंडिया ग्लोबल 2021 चुनी गईं माही गोस्वामी (Mahi Goswami) पर सटीक बैठती हैं. 

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भीलवाड़ा (Bhilwara) ज़िले की रहने वाली माही को कल तक कोई नहीं जानता था, लेकिन आज हर कोई उनके बारे में जानना चाह रहा है. माही के पिता सोहनपुरी गोस्वामी (Sohanpuri Goswami) भीलवाड़ा रोडवेज विभाग (Bhilwara Roadways Department) में बस चलाते हैं और उनकी मां कौशल्या देवी हाउस वाइफ हैं. यहां चौंकाने वाली बात ये है कि माही खुद दो बच्चों की मां हैं और ससुराल की प्रताड़नाओं से तंग आकर ही उन्हें आज ये मुक़ाम मिला है.

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दरअसल, छोटी उम्र में परिवारिक मज़बूरियों के चलते माही का विवाह भीलवाड़ा के ही रहने वाले सतीश पूरी के साथ हो गया. कम उम्र में दो-दो बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई लेकिन कुछ करने का जज्बा और सपनों की उड़ान ने मां बनने के बाद भी माही के जज्बे को कम नहीं होने दिया. माही का बचपन मुश्किलों में बीता है.

अपने माता-पिता के संघर्षों पर माही ने क्या कहा 
लोगों की सोच अलग-अलग होती है, देश में कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां कुछ लोग सोचते हैं कि लड़कियां ज़्यादा आगे नहीं बढ़ सकतीं." वो कहती हैं, "ऐसी सोच वालों को यही कहूंगी कि आप कहीं से भी हों, चाहे आपके पास कपड़े हों या न हों या फिर आप कैसे भी दिखते हों, आपके पास पैसे हों या न हों, लेकिन जब आप अपनी कल्पना से बढ़कर सपने देखते हैं तो आप आसमान छू सकते हैं, इसलिए जब तक आप सपने नहीं देखेंगे, तब तक आपको अपनी अहमियत का पता नहीं चलेगा."

माही के अब तक के सफर के बारे में जान लीजिए
माही ने बचपन से ही पैसों की तंगी देखी है. उन्होंने कई बार भूखे रहकर कई रातें बिताई हैं. पैसे बचाने के लिए वो कई-कई किलोमीटर पैदल चली हैं. माही के पास जो भी कपड़े थे, वो उनके खुद के सिले हुए थे, यहां तक कि उनकी डिग्री की फ़ीस देने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा. बावजूद इसके भी फीस जमा नही हो पाई तो उनके मां और पिता को ज़ेवर तक गिरवी रखने पड़े थे. 

अपने उन दिनों को याद करते हुए माही कहती हैं, "हर किसी की ज़िन्दगी में कभी न कभी ऐसा मोड़ आता है जब लगता है कि सब कुछ बिखर चुका है, मुझे भी लगा था कि आगे क्या होगा?" वो कहती हैं, "मैं हमेशा मानती हूं कि औरतों में एक अलग ताकत होती है, इसलिए मैं जब भी अपने माता-पिता की तरफ देखती हूं तो यही सोचती हूं कि यहां रुक गई तो कहीं इन्हें ऐसा न लगे कि काश बेटा होता तो संभाल लेता. इसलिए मैंने बड़ी बेटी का रोल निभाया. मैं लड़का तो नहीं बन सकती लेकिन मैंने ऐसा ज़रूर किया कि उन्हें बड़े लड़के की ज़रूरत ही नहीं हो. मेरी मेहनत अगर 20 फीसदी है तो उनकी लगन 80 फीसदी है. उन्होंने जिस तरह की क़ुर्बानी दी है, वही मेरे लिए प्रेरणा है."

नामुमकिन को कर दिखाया मुमकिन 
ब्यूटी कॉन्टेस्ट के बारे में अक्सर ये माना जाता है कि ये अमीरों के लिए होता है, जिनके पास पैसे नहीं हैं, उनके लिए इस कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेना बेहद मुश्किल है.. माही कहती हैं, "बैकअप जब हमारे पास होता है तो दिमाग़ में आता है कि अगर यहां नहीं हुआ तो हमारे पास कोई दूसरा विकल्प भी है, लेकिन मैंने हमेशा यही सोचा कि मेरे पास कोई और विकल्प नहीं है, मैंने सोचा कि मैं गिर जाऊंगी तो फिर उठूंगी और फिर से गिरी तो दोबारा उठूंगी." वो कहती हैं, "असफलता मेरी साथी है, मेरे मुंह पर हमेशा से ही दरवाज़े बंद किए गए हैं. लोग मुझसे कहते थे कि तुम मिस इंडिया जैसी नहीं दिखती, तुम तो कभी मिस इंडिया के लेवल तक पहुंच ही नहीं पाओगी, लेकिन इन सब बातों से मैंने एक चीज़ सीखी है और वो ये कि लोग क्या कहेंगे, ये ज़रूरी नहीं है, ये ज़रूरी है कि मैं ये जानूं कि मैं क्या चाहती हूं और मैं किसके लिए योग्य हूं. इसमें मेहनत मेरी होगी न कि लोगों की, इसलिए बेहद ज़रूरी है कि हम ख़ुद पर विश्वास रखें.

REPORTER- Dilshad Khan
WRITTEN BY- Awanish Mishra