Bhilwara News: सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर! बिलिया गांव में छत विहीन मोक्षधाम में बारिश में भीगते हुए अंतिम संस्कार, सिस्टम की नाकामी की पोल खोलता है.
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Bhilwara News: सरकार भले ही डिजिटल इंडिया और स्मार्ट गांवों की बातें करे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. मांडलगढ़ के बिलिया गांव में एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद, बारिश के बीच लाखों रुपये से बने छत विहीन मोक्षधाम में उनका अंतिम संस्कार करना पड़ा. सिस्टम की नाकामी के कारण शव का अंतिम संस्कार बारिश में भीगते हुए करना पड़ा, जो सरकार के दावों की पोल खोलता है.
बिलिया गॉंव में ऐसा मोक्षधाम हैं जहां क्षतिग्रस्त चबूतरे पर न छत हैं और न टिन शेड हैं. बारिश के दौरान अंतिम संस्कार के समय शव और परिजनों को भीगने को मजबूर होना पड़ा है. बारिश की फुहारों में कई बार चिता जलाने में दिक्कत आई है, रबर के टायर ओर ज्वलनशील पदार्थ से शव का अंतिम संस्कार करना पड़ा, जिससे परिजनों को मानसिक और धार्मिक रूप से अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा है.
इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने कई बार पंचायत और प्रशासन को मोक्षधाम में छाया के लिए के मांग की , लेकिन आज तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया. ग्रामीणों का आरोप हैं कि बरसात के मौसम में अंतिम संस्कार करना बेहद मुश्किल हो जाता है. न लकड़ी सूखी मिलती है, न आग जलती है, और छाया न होने से बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे बारिश में भीगते रहते हैं.
मोक्षधाम जैसे पवित्र स्थल को लेकर प्रशासन की लापरवाही जनभावनाओं को आहत कर रही है.
जिम्मेदारों के लिए डिजिटल इंडिया की तस्वीर तब ही सच्ची होगी जब गांवों के मोक्षधाम भी सुविधाओं से युक्त होंगे, ताकि मृतकों को सम्मानजनक विदाई और परिजनों को कठिन समय में सहूलियत मिल सके.
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