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Bhilwara News: जिले की करेड़ा पंचायत समिति के ग्राम पंचायत आमदला के राजस्व गांव कैमरी में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखता है. आजादी के 75 वर्षों के बाद भी यहां के ग्रामीणों को श्मशान घाट तक जाने के लिए पक्के रास्ते की सुविधा नहीं मिली. हालात इतने बदतर हैं कि हर साल बारिश के मौसम में यहां का मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है.
बरसात में रास्ता बनता है जलभराव का जंजाल
गांव के रास्ते में हर साल 1 से 3 फीट तक पानी भर जाता है, जिससे करीब 500 मीटर लंबा हिस्सा दलदल जैसा हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार पंचायत और प्रशासन को समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला.
अंतिम संस्कार में दिखा दर्दनाक नजारा
हाल ही में कैमरी निवासी कांता देवी प्रजापत का निधन हो गया. अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीण शव को लेकर मोक्षधाम की ओर निकले. लेकिन मोक्षधाम से आधा किलोमीटर पहले रास्ते में करीब 3 फीट तक पानी भर जाने के कारण वाहन चालक लकड़ियां बीच रास्ते में ही उतारकर चला गया.
उसके बाद अंतिम संस्कार में शामिल ग्रामीणों ने एक-एक लकड़ी कंधे पर उठाकर श्मशान भूमि तक पहुंचाई. यह नजारा गांव की बदहाली और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करने वाला था.
ग्रामीणों का गुस्सा और सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से पंचायत और अधिकारियों को इस समस्या के बारे में शिकायत कर रहे हैं, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई. लोग सवाल कर रहे हैं कि जब अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील मौके पर भी सम्मानजनक सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो विकास के दावों का क्या मतलब है.
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