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Rajasthan News: राजस्थान के शाहपुरा कस्बे में 1965 भारत-पाक युद्ध के जांबाज सिपाही स्वर्गीय रामेश्वर लाल त्रिपाठी को याद किया गया. बस स्टैंड पर बने डिवाइडर पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और देशभक्ति के नारे गूंजे. इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने त्रिपाठी की शौर्य गाथाओं को याद किया, जिन्होंने युद्ध में अपने अदम्य साहस से न केवल 15 घायल सैनिकों की जान बचाई थी, बल्कि भारत को विजय दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
त्रिपाठी का अद्भुत शौर्य: 1965 युद्ध में भारत की जीत में योगदान
1965 के भारत-पाक युद्ध में रामेश्वर लाल त्रिपाठी ने अपने साहस और वीरता से दुश्मन को परास्त करने में अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने न केवल अपने घायल साथियों को सुरक्षित निकाला, बल्कि मां भारती की रक्षा में भी योगदान दिया. उनकी इस वीरता के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा था, "भारत भूमि को आप जैसे वीर सैनिकों पर नाज है."
राष्ट्रपति द्वारा सम्मान और स्वर्ण जयंती पर हाई टी
वर्ष 2015 में 1965 युद्ध की स्वर्ण जयंती के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रामेश्वर लाल त्रिपाठी को राष्ट्रपति भवन में हाई टी के लिए आमंत्रित कर पदक से सम्मानित किया था. यह सम्मान उनकी वीरता और देशभक्ति का प्रतीक था. आज भले ही त्रिपाठी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शौर्य गाथाएं शाहपुरा के हर बच्चे की जुबान पर हैं.
स्थानीय लोगों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि सभा में सैनिक पुत्र पंकज त्रिपाठी, संघ प्रमुख सत्य प्रकाश कबरा, सरपंच सत्यनारायण मालू, पूर्व सैनिक सूरत राम, सुनील बेली, वीरेंद्र व्यास, हीरालाल आर्य, लक्ष्मी नारायण, चंद्र प्रकाश सहित कई कस्बेवासी शामिल हुए. सभी ने त्रिपाठी की बहादुरी के किस्सों को साझा कर उन्हें नमन किया और उनकी स्मृति को जीवंत रखने का संकल्प लिया.
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