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भीनमाल: सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं के ने किया कब्जा, नगरपालिका बेखबर

भीनमाल शहर के बीचो-बीच कभी सार्वजनिक कामों में उपयोग होने वाली बेशकीमती जमीन अब कुछ ही दिनों में देखने को नहीं मिलेगी. 

भीनमाल: सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं के ने किया कब्जा, नगरपालिका बेखबर
इस जमीन की 100 करोड़ रुपये में बोली लग चुकी है.

बबलु मीणा/भीनमाल: जालोर के भीमनाल शहर के रखवाले शहर को बेचने लग जाए तो भला शहर कैसे बच सकता है. जी हां ऐसा ही कुछ वाकया भीनमाल में देखने को मिल रहा है, जहां पर करीब 100 करोड़ रुपया की ज़मीन पर कब्जा करके कुछ ही दिनों में भू-माफिया बेखौफ तरीके से अरबपति बन जाएंगे. नगरपालिका देखती रह जाएगी.

भीनमाल शहर के बीचो-बीच कभी सार्वजनिक कामों में उपयोग होने वाली बेशकीमती जमीन अब कुछ ही दिनों में देखने को नहीं मिलेगी. इस जमीन की 100 करोड़ रुपये में बोली लग चुकी है. ये भू माफ़ियाओं के हत्थे चढ़ चुकी है. बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में इसके फर्ज़ी तरीक़े से पट्टे भी बनाकर बड़े बड़े कॉमर्शियल मॉल खड़े किए जाएंगे. एक प्रॉपर्टी डीलर के अनुसार इस पर करीब 200 करोड़ रुपया इन्वेस्ट करके अरबो रुपये में इस संपत्ति को बेचा जाएगा.

मजें की बात है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि व विभाग के नुमाइंदे भी इसको रोकनें को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. भला जब विभाग के आला अधिकारी व बड़े बड़े राजनेता इस बड़े खेल में शामिल हो तो किसकी हिमाकत की इस पूरे खेल को रोक सकें. वही जब जान से मारने का डर हो तो भला कौन आवाज़ उठाएगा. जब हमारे संवाददाता ने भीनमाल के अधिशासी अधिकारी को इस पूरी घटना के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा मेरी गत छह माह पूर्व में यहां पर पोस्टिंग हुई है. मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं. उन्होने कहा आपके द्वारा ही मुझे बताया गया है. 

वहीं कांग्रेस के पूर्व विधायक रतन देवासी के पास मामला पहुचनें के बाद वह खुलकर सामने आए. देवासी ने जी मीडिया से खुलकर बातचीत करते हुए कहा है कि इस ज़मीन को बेख़ौफ तरीके से बेचने की प्लानिंग चल रही है और ये पूरा खेल करोड़ रुपया में खेला जाएगा. अगर समय रहते हैं विभागीय अधिकारी व स्थानीय लोग चाहें तो 100 करोड़ रुपयों की जमीन को बचाया जा सकता है. देवासी ने कहा किे में मुख्यमंत्री को इस पूरे मामले की शिकायत करुंगा. 

वहीं जब शहर के बड़े प्रॉपर्टी डीलरों के पास संवाददाता पहुंचे तो उनके अनुसार इस ज़मीन का कुछ हिस्सा जरूर पट्टा सुदा बताया जा रहा है और बाकी की पूरी जमीन नगरपालिका की है. जिसकों बेचनें की तैयारी की जा रही हैं. विवादित नगरपालिका की ज़मीन पर 1950 से पार्टी का क़ब्ज़ा बताया जा रहा है. जब की अभी मौके पर किसी तरह का काई कब्जा नही है. 

यह जानकारी हमें शहर के के डीलर ने बताई. ऐसे ऐसे में अब मौक़े पर किसी तरीक़े का कोई कब्जा नहीं होने के बावजूद भी नगर पालिका की ओर से ढिलाई देकर इस पूरे मामले को फाइलें ग़ायब करने की प्लानिंग चल रही है. अगर समय रहते इस पूरे मामले की अगर सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएं तो इस करोड़ों की ज़मीन को बचाया जा सकता है.

भीनमाल में भी पार्षद चूप क्यों? भीनमाल में भाजपा का बोर्ड है, लेकिन वर्तमान में राज्य में कांग्रेस की सरकार है. अब आयुक्त कांकरिया को कांग्रेस के ही पदाधिकारियों ने भीनमाल में सिफारिश करवाकर लगवाया है. ऐसे में कांग्रेसी पार्षद ना तो विरोध कर सकते हैं और न ही कोई शिकायत. इधर, भाजपा का बोर्ड होने से भाजपा वाले विरोध कर भी दे, लेकिन सरकार कांग्रेस की है तो उनकी चलेगी ही नहीं. सवाल यह उठता है कि भीनमाल के पार्षद, जिन्हें जनता ने शहर के विकास के लिए चुना है, वे शहर की बर्बादी कैसे देख सकते हैं?