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बीकानेर: पर्यावरण प्रेमी ने घर पर बनाई शानदार नर्सरी, 3000 पौधों का किया निशुल्क वितरण

सीमा शेवकानी ने बताया कि उनके दिन की शुरुआत पौधों को पानी देने सहित पौधों की अन्य देखभाल करने से होती है तथा पौधों के बारे में चर्चा करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है.

बीकानेर: पर्यावरण प्रेमी ने घर पर बनाई शानदार नर्सरी, 3000 पौधों का किया निशुल्क वितरण
इस नर्सरी में वर्तमान में 350 से 400 पौधे है

अनूपगढ़: शहर लोगों के अलग के शौक अलग-अलग होते हैं. किसी को घूमने को शौक होता है तो किसी को समाजसेवा का, लेकिन अनूपगढ़ के वार्ड नम्बर 15 में एक ऐसे भी व्यक्ति है जिन्हे इन सबके साथ सबसे अधिक पौधे लगाने का शौक है. यह व्यक्ति भारत विकास परिषद के अध्यक्ष रमेश शेवकानी है. शेवकानी के इसी शौक को देखते हुए भारत विकास परिषद ने इन्हे विभिन्न स्थानों पर लगाए जाने वाले पौधों को सम्भालने की जिम्मेदारी दी. जिसके चलते शेवकानी ने अपने घर एक हिस्से को नर्सरी का रुप दे दिया.

इस नर्सरी में वर्तमान में 350 से 400 पौधे है और कभी कभी इनकी संख्या 1000 से भी ऊपर हो जाती है. जिनकी देखभाल रमेश शेवकानी तथा उनकी पत्नि प्रांतीय सांस्कृतिक सप्ताह प्रभारी सीमा शेवकानी साथ मिलकर करते है. सीमा शेवकानी ने बताया कि उनके दिन की शुरुआत पौधों को पानी देने सहित पौधों की अन्य देखभाल करने से होती है तथा पौधों के बारे में चर्चा करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है.

अब तक कर चुके 3000 पौधों का निशुल्क वितरण
रमेश शेवकानी ने बताया कि उन्हे पौधे लगाने का शुरू से ही शौक था, लेकिन पिछले 5 वर्षो में इस शौक ने जुनून का रुप ले लिया है. उन्होने बताया कि जब वह परिषद में सचिव पद पर थे तभी से भारत विकास परिषद के पौधरोपण अभियान से उन्हे यह प्रेरणा मिली है. भारत विकास परिषद के सदस्यों के साथ उन्होने न्यायालय परिसर, आदर्श विद्या मंदिर स्कूल, बस स्टैंड,पब्लिक पार्क, स्वामी विवेकानंद स्कूल सहित अन्य स्थानों पर सघन पौधरोपण अभियान चलाया हुआ है.

अब वह कहीं घूमने भी जाते है तो नई किस्म का पौधा देखने और उसकी किस्म की जानकारी लेने की उत्सुकता रहती है. शेवकानी ने अपने संस्मरण याद करते हुए बताया कि कर्ई ऐसे पथरीले स्थानों पर पौधों को बढ़ते देखते हुए मन हर्षा जाता है, जिन स्थानों पर लोगों ने कहा कि इन स्थानों पर पौधरोपण सम्भव नहीं है. उन स्थानों पर हाइड्रो मशीन की सहायता से गड्ढे खोदकर मिट्टी बदल कर पौधरोपण किया. तीन स्थानों पर पौधरोपण करते हुए मशीन के ब्लेड़ टूट गए लेकिन उन्होने कभी हार नहीं मानी. उन स्थानों पर आज पौधे पेड़ का रुप धारण कर चुके है.