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बीकानेर: आसमान में छाई धूल की चादर, अस्थमा के मरीजों की बढ़ी परेशानी

आसमान में छाई गर्द से अस्थमा व सांस के रोगियों का जीना बेहाल हो गया है. ऐसे रोगियों को डॉक्टर घर मे रहने की सलाह दे रहे है. 

बीकानेर: आसमान में छाई धूल की चादर, अस्थमा के मरीजों की बढ़ी परेशानी
दुपहिया वाहनों पर चलना मुश्किल हो गया है.

त्रिभुवन रंगा/बीकानेर: बारिश की आस में बरसी धूल, आसमान में छाई गर्द से जीना हुआ बेहाल, सांस की बीमारी और अस्थमा के मरीजों को परेशानी हो रही है. दुपहिया वाहनों पर चलना मुश्किल हो गया है.

मानसून में बारिश की आस लगाए बीकानेर वासियों को दो दिनों से चल रही रेतभरी आंधी से दो चार होना पड़ रहा है. आसमान में छाई गर्द से अस्थमा व सांस के रोगियों का जीना बेहाल हो गया है. ऐसे रोगियों को डॉक्टर घर मे रहने की सलाह दे रहे है. वहीं सड़को पर दुपहिया वाहनों को दिन में भी हेडलाइट जला कर चलना पड़ रहा. इस आंधी के कारण गृहणियों के काम में भी इजाफा हो गया है.

बीकानेर ज़िले में कई दिनों से चल रही पश्चिमी हवाओं ने मानसून का और इंतजार करने को मजबूर कर दिया है. अगर पुराने लोगों की बात के अनुसार जब तक पश्चिमी हवाओं का दौर चलेगा तब तक बारिश की आस करना बेमानी होगा. रेतिलो टीलों के ऊपर से गुजरने वाली ये हवाएं अपने साथ रेत को भी उठा कर चलती है, जिससे होने वाली आंधी से लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ता है.

वहीं इस आंधी से किसानों के चेहरों पर भी मायूसी देखी जा सकती है और मायूसी हो भी क्यों न पश्चिमी हवाएं इतनी शुष्क होती है. उनके खेतों की नमी को एक सप्ताह में ही खत्म कर देती है. दूसरी तरफ दिनभर चलने वाली इन आंधियो से महिलाओं को भी बार-बार घर साफ करना पड़ रहा है.

आसमान से बरती रेत ने बीकानेर जिले में जीना दूभर कर दिया है. वही किसानों के चेहरों की रौनक को छीन रहा है. अब तो हर कोई आसमान में टक टकी लगाए मुँृह से एक ही बात निकल रही है अब तो बरसो रामजी.