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बीकानेर: प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रही सुरसागर झील, पर्यटक निराश

आम जनता और पर्यटन की पसंदीदी इस जगह पर सन्नाटा हैं क्योंकि प्रसाशान की लापरवाही ने इस झील हाल खस्ता कर दिया है. 

बीकानेर: प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रही सुरसागर झील, पर्यटक निराश
झील में दीवारें टूट गयी हैं.

रौनक व्यास/बीकानेर: प्रदेश के शहर बीकानेर की ऐतिहासिक झील सुरसागर की दशा एक बार फिर बिगड़ गयी है. जहां जूनागढ़ क़िले के सामने होने के कारण यहां पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता था वहीं इन दिनों इस झील के हाल बेहाल है. पानी गंदा है साथ ही झील की रेलिंग टूटी हुई है. प्रशासन की लापरवाही का ख़ामियाज़ा झील की बिगड़ी दशा को देखकर लगाया जा सकता है, लेकिन इन दिनों प्रशासन कीं अनदेखी के चलते इस झील के हाल खस्ता हैं. हालत ये हैं कीं झील में सिवरेज का गंदा पानी का रिसाव हो रहा है ऐसे में पर्यटन का मुख्य केंद्र अब गंदगी में तब्दील होता नजर आ रहा हैं. 

बीकानेर के जूनागढ़ किले के ठीक सामने राजा महाराजाओं के समय में बनी एक ऐसी झील जिसका रेगिस्तान के इतिहास के साथ साथ सौंदर्यता का अपना एक अलग स्थान है. लेकिन वक़्त के साथ इस झील का स्वरूप पूरी तरह बदल गया. जहां ये झील पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो गयी. कई दशकों तक चुनाव सिर्फ इस झील की सफाई के मुद्दों पर लड़े गए. लेकिन झील की किस्मत नहीं बदली. 

2007-8 में वसुंधरा सरकार ने इस झील की पहले जैसा रूप देकर सुंदरता प्रदान तो की, लेकिन आज फिर प्रशासन की बेरूख़ी का ख़ामियाज़ा झील के स्वरूप को बदलता दिखाई दे रहा है. झील में दीवारें टूट गयी हैं. पानी बदबू मार रहा है. इसी बीच झील में लगे फव्वारे टूट चुके हैं और चलने वाली बोट इसके हालात को बयान करने के लिए काफ़ी है.

आम जनता और पर्यटन की पसंदीदी इस जगह पर सन्नाटा हैं क्योंकि प्रशासन की लापरवाही ने इस झील हाल खस्ता कर दिया है. अगर इस झील पर पैसे लगाने की बात करें तो जनता के करोड़ों रुपय लगाए जा चुके हैं. कांग्रेस से लेकर भाजपा के मंत्री ओर नेताओ की करोड़ों रुपय के काम करवाने की पट्टिकाए लगी है, लेकिन इतने ख़र्च के बावजूद इसके ख़स्ता हाल है. इस बीच जनता नाराज है तो यूआईटी इसे फिर से चमन बनाने के दावे कर रही है. 

हालांकि सबसे खास झील होने के चलते इसको फिर से ठीक करवाने की बात की जा रही है. वहीं इन सब के बीच यह विधानसभा में हमेशा से चुनावी मुद्दा रहा है, लेकिन लोकसभा में मुद्दा ना होने के कारण शायद सरकार का ध्यान इस और नहीं गया लेकिन झील के हालत से जनता में बड़ा रोष है.