बीकानेर का परकोटा हुआ प्रशासन की लापरवाही शिकार, हाल बेहाल

बीकानेर की बेजोड़ स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना की झलक देता रियासत कालीन परकोटा जर्जर है. अतिक्रमण की ऐसे आंधी चली की अब इस परकोटे के अवशेष बच गए हैं.

बीकानेर का परकोटा हुआ प्रशासन की लापरवाही शिकार, हाल बेहाल
बीकानेर शहर का परकोटा अपनी दुर्दशा के आंसू रो रहा है.

त्रिभुवन रंगा/बीकानेर: विरासत, स्थापत्य कला और अपनी संस्कृति से विश्व पटल पर खास पहचान बनाने वाले बीकानेर शहर का परकोटा दुर्दशा का शिकार हो रहा है. देशी नहीं विदेशी पर्यटक इस विरासत को देखने के लिए दूर दराज से आते है, लेकिन परकोटे के मौजूदा हालात बद से बदतर हो रहे है. ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है. जानकारी होने के बाद भी परकोटे की पीड़ा समझने वाला कोई नहीं है. ऐसे में जहां राजधानी जयपुर को विश्व विरासत की सूची में शामिल किया गया. वहीं, बीकानेर शहर का परकोटा अपनी दुर्दशा के आंसू रो रहा है.

हाल ही, में जयपुर के परकोटे के सरंक्षण के कारण हैरिटेज सिटी के रूप में नवाजा गया है. वहीं, बीकानेर की बेजोड़ स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना की झलक देता रियासत कालीन परकोटा जर्जर है. अतिक्रमण की ऐसे आंधी चली की अब इस परकोटे के अवशेष बचे हैं.

आम सोच के अनुसार विरासत को अपना अभिमान माना जाता है. इस अभिमान को बनाए रखने के लिए इसकी सुध लेना भी जरुरी है. दरअसल, इस परकोटे की दुर्दशा के दो कारण है. पहला खुद शहरवासी एक कहावत है कि जो बाड़ (तारबंदी) खेत को खाये उस खेत को कौन बचाए. वहीं, दूसरा कारण प्रशासन की अनदेखी के चलते परकोटा जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो चुका है. जगह-जगह अतिक्रमण ने भी इसकी स्थापत्य पर कलंक लगाने का काम किया है. रियासतकाल में अपने वैभव की आभा बिखेरने वाला परकोटा अब सिकुड़ता जा रहा है. शहर का सौन्दर्य बढ़ाने और रियासत का संरक्षण करने का दम भरने वाले नगर निगम ने भी आंखे मूंद रखी है.

ऐसा नहीं है कि स्थानीय प्रशासन को इस कि जानकारी नहीं है. परकोटा जगह जगह पूरी तरह से टूट चुका है. वहीं गंदगी के आलम भी इसकी पहचान छुपाने में अपनी खास अहमियत रख रहा है. जगह-जगह गंदगी से अटा होने के कारण लोगो का निकलना भी दुभर हो गया है. दीवारे जहां पोस्टरों से अटी हुई है तो गेट भी खराब हो गए हैं. परकोटे में हवेलियां स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है, लेकिन देखरेख के अभाव में अपना मूल स्वरूप अब यह खोता जा रहा है. 

फिलहाल, राजधानी जयपुर के परकोटे ने विश्व विरासत की सूची में शामिल होकर प्रदेशवासियों को गौरवान्वित किया है. वहीं इन सब के बावजूद बीकानेर का परकोटा अपनी दुर्दशा को देख इतंजार कर रहा है कि कोई तो उसकी सुध लेगा.