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Bikaner News: बीकानेर, राजस्थान से एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है, जहां भारतीय वायुसेना (IAF) ने अपने दिग्गज सुपरसोनिक लड़ाकू विमान मिग-21 को ऑपरेशनल सर्विस से विदाई देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. 26 सितंबर 2025 को मिग-21 की अंतिम उड़ान होगी, जिसके बाद इसे आधिकारिक तौर पर सेवामुक्त कर दिया जाएगा.
इस अवसर पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने बीकानेर के नाल एयरबेस पर मिग-21 में उड़ान भरी और इसकी गौरवशाली विरासत को सलाम किया. भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि मिग-21 छह दशकों से अधिक समय तक भारतीय वायुसेना की रीढ़ रहा है. उन्होंने 1985 में तेजपुर में पहली बार मिग-21 उड़ाने के अपने अनुभव को साझा करते हुए इसे फुर्तीला, मैनूवरेबल और सरल डिज़ाइन वाला विमान बताया, जो 200-250 मीटर प्रति सेकंड की दर से चढ़ सकता था.
मिग-21 ने भारतीय वायुसेना के इतिहास में कई स्वर्णिम अध्याय लिखे. 1963 में "फर्स्ट सुपरसोनिक्स" स्क्वाड्रन के साथ शामिल हुआ यह विमान 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के एफ-104 को मार गिराने और ढाका के गवर्नर हाउस पर हमला कर आत्मसमर्पण का रास्ता खोलने में अहम रहा. 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद विंग कमांडर (अब ग्रुप कैप्टन) अभिनंदन वर्धमान ने मिग-21 बाइसन से पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराकर आखिरी रिकॉर्डेड "किल" दर्ज किया. हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर (2025) में भी इसका उपयोग हुआ.
विंग कमांडर जयदीप सिंह ने कहा कि मिग-21 ने लगभग हर जनरेशन के विमानों को हराया, जो एक अनूठा इतिहास है.वर्तमान में मिग-21 की आखिरी दो स्क्वाड्रन, नंबर 3 कोबरा और नंबर 23 पैंथर्स, बीकानेर के नाल एयरबेस पर तैनात हैं. 19 सितंबर को चंडीगढ़ एयरबेस पर इसका मुख्य विदाई समारोह होगा. 62 साल की सेवा के बाद मिग-21 की जगह अब तेजस LCA मार्क-1A लेगा. भारतीय वायुसेना के लिए मिग-21 का योगदान हमेशा एक स्वर्णिम अध्याय रहेगा, जिसे हर पायलट और वायुसैनिक गर्व के साथ याद रखेगा.