ओरण बचाने निकले बीकानेर के चित्रकार, 19 सिंतबर को आर-पार की लड़ाई का एलान

Rajasthan News: राजस्थान के बीकानेर में कलाकारों ने गोचर व ओरण भूमि बचाने के लिए अनोखा प्रदर्शन किया. गलियों में चित्रकारी, स्लोगन और गीतों से जागरूकता फैलाई जा रही है. स्थानीय लोग व सामाजिक समूह भी समर्थन में हैं. 19 सितंबर को बड़ा विरोध प्रदर्शन होगा.

ओरण बचाने निकले बीकानेर के चित्रकार, 19 सिंतबर को आर-पार की लड़ाई का एलान
Image Credit: oran land protest bikaner

Bikaner News: राजस्थान के बीकानेर में चित्रकारों का अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला. जहां शहर में गोचर और ओरण भूमि के संरक्षण के लिए अनोखे अंदाज में विरोध शुरू कर दिया है. शहर की कई गलियों और मोहल्लों में कलाकारों ने बड़ी-बड़ी चित्रकारी और सादे-संदेश वाले स्लोगनों के माध्यम से लोगों को गोचर बचाने का संदेश दिया है, वही गीतों के माध्यम से भी जागरूकता का संदेश दे रहे है ताकि यह संवेदनशील जमीन आवासीय या अन्य विकास के चक्र में न फंसे.

भूमि का अधिग्रहण करेगा प्रभावित
स्थानीय लोग और सामाजिक सक्रिय समूह इस अभियान के साथ खड़े हैं, उनका कहना है कि बीडीए द्वारा 35 से 40 किलोमीटर तक भूमि का अधिग्रहण कई पारंपरिक हिस्सों को प्रभावित कर सकता है विरोध में यह भी कहा जा रहा है कि जिन क्षेत्रों में गोचर या ओरण भूमि आती है, वे सभी अब बीडीए के दायरे में आ गए हैं और यही बात स्थानीय पारिस्थितिकी पर असर डाल सकती है. कलात्मक विरोध के माध्यम से कलाकार सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं और आने वाले दिनों में जनता को साथ लेकर नीति निर्माताओं तक अपनी बात पहुंचाने कोशिश कर रहे हैं इसी कड़ी में 19 सितंबर को बीकानेर में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. जिसमें कलाकारों, प्रतिनिधियों और नागरिकों की सहभागिता रहेगी.

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क्या है ओरण भूमि ?
ओरण भूमि राजस्थान की पारंपरिक सामुदायिक भूमि होती है, जिसे धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से सुरक्षित रखा जाता है. इसे देवस्थल या पवित्र भूमि भी कहा जाता है, जहां मंदिर, थान और पवित्र वृक्ष पाए जाते हैं. ओरण भूमि पर किसी तरह का निजी कब्जा, खेती या निर्माण वर्जित होता है. यह भूमि पशुओं की चराई, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. ग्रामीण समाज इसे आस्था से जोड़कर देखता है और पीढ़ियों से इस परंपरा को निभाता आ रहा है.

क्या है ओरण बचाओ आंदोलन ?
ओरण बचाओ आंदोलन राजस्थान का एक जनआंदोलन है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक ओरण भूमि को बचाना है. ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और कलाकार मिलकर यह मांग कर रहे हैं कि इस सामुदायिक व पवित्र भूमि को किसी भी औद्योगिक या विकास परियोजना में शामिल न किया जाए. आंदोलन के तहत चित्रकारी, नारे, गीत और विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है, क्योंकि ओरण भूमि धार्मिक आस्था, पशुओं की चराई और पर्यावरणीय संतुलन से गहराई से जुड़ी हुई है.

ओरण भूमि को कैसे बचाया जा सकता है ?
ओरण भूमि को बचाने के लिए समाज और सरकार दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है. इसे कानूनी रूप से संरक्षित कर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करना, स्थानीय समुदाय को जागरूक कर परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना और सामुदायिक देखरेख जारी रखना, वृक्षारोपण व जैव विविधता संरक्षण करना, नियंत्रित चराई को बढ़ावा देना और सरकारी योजनाओं का समन्वय करना आवश्यक है. धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व को जोड़कर लोगों की आस्था को जीवित रखना भी जरूरी है. इस तरह कानूनी सुरक्षा, सामाजिक भागीदारी और पर्यावरणीय प्रबंधन के संगठित प्रयासों से ही ओरण भूमि को सुरक्षित रखा जा सकता है.

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SAGAR CHAUDHARY

SAGAR CHAUDHARY

सागर चौधरी एक अनुभवी और समर्पित सब-एडिटर हैं, जो वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में करीब 2 साल का अनुभव है, और इस दौरान उन्होंने तेज, सटीक और भरोसेमंद न्यूज़ कंटेंट तैयार करके अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. राजस्थान की हर बड़ी और छोटी खबर पर उनकी अच्छी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है. अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं. सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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