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Sri Ganganagar Rain Updates: अनूपगढ़ क्षेत्र में गुरुवार रात 1:30 बजे से लेकर सुबह शुक्रवार सुबह 11 तक लगातार 8 घंटे की बरसात ने जहां एक ओर शहरी क्षेत्र के लोगों को परेशान कर दिया है. वहीं इस बरसात ने किसानों की कमर तोड़ दी है. लगातार हुई 8 घंटे की बरसात के कारण किसानों के खेतों में लगभग डेढ़ से 2 फीट तक पानी रुक गया है. खेतों में पानी रुकने के कारण खेतो में खड़ी नरमा, ग्वार, मूंग, मोठ और धान की फसल को नुकसान हुआ है. इस बरसात के कारण सबसे ज्यादा नुकसान नरमे और धान की फसल को हुआ है.
गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष उत्पादन में आएगी गिरावट
पिछले साल न तो अतिवृष्टि हुई और न ही किसानों को सिंचाई पानी की किल्लत का सामना करना पड़ा. इसलिए पिछले साल नरमे और धान की फसल का अच्छा उत्पादन हुआ था. किसानों के अनुसार पिछले साल 25 बीघा भूमि में लगभग 170-200 क्विंटल नरमे का उत्पादन हुआ था. मगर इस बार अधिक बरसात होने के कारण यह उत्पादन घटकर 50-70 क्विंटल ही रह जायेगा.
किसान अपने स्तर पर निकाल रहे हैं पानी
खेतों में भरे पानी को निकालने के लिए किसान अपने स्तर पर बर्मा और पंप सेट का उपयोग कर रहे हैं. एक घंटे के पंप सेट का किराया करीब एक हजार रुपये है, जिसे वहन करना छोटे और मध्यम वर्गीय किसानों के लिए अत्यंत कठिन हो गया है. किसान इस आपदा को अकेले झेलने को मजबूर हैं, जबकि प्रशासनिक सहायता अभी तक मौके पर नहीं पहुंची है. किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द विशेष गिरदावरी करवा कर नुकसान का आंकलन किया जाए और मुआवजा प्रदान किया जाए. साथ ही जल निकासी के लिए सरकारी स्तर पर तुरंत राहत कार्य शुरू किए जाएं ताकि और अधिक नुकसान से बचा जा सके.
प्राकृतिक आपदा बनी किसानों के लिए समस्या
नरमा और धान जैसी नकदी फसलों को भारी नुकसान होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है. मौसम विभाग ने आगामी दिनों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे किसानों की चिंता और भी बढ़ गई है. अनूपगढ़ क्षेत्र में यह प्राकृतिक आपदा किसान वर्ग के लिए गहरा संकट बन चुकी है, जिसके असर से उबरने के लिए प्रशासनिक सहयोग अब अनिवार्य हो गया है.
तहसीलदार ने दिए आवश्यक निर्देश
तहसीलदार श्रीवर्धन शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में हुई बरसात के कारण किसानों के हुए नुकसान की सूचना उन्हें किसानों से मिल रही है. उन्होंने बताया कि इसके लिए गिरदावर और पटवारी को निर्देशित किया गया है कि वह अपने-अपने फील्ड में रहकर पूरी स्थिति का जायजा ले. स्थिति का जायजा लेने के बाद तुरंत प्रभाव से इसकी रिपोर्ट तहसील कार्यालय में जमा करवाएं, ताकि किसानों को राहत पहुंचाने के लिए उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार आगामी कार्रवाई की जा सके.
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