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Sri Ganganagar News: राजस्थान में श्रीगंगानगर के किसान अब फिर से आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं. इसे लेकर किसान मोर्चा के आह्वान पर अखिल भारतीय किसान सभा, किसान आर्मी, किसान संघर्ष समिति व टेल किसान संघर्ष समिति के मुख्य पदाधिकारियों की गजसिंहपुर के गुरुद्वारा सिघ सभा में किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई.
कई मांगों पर की गई चर्चा
बैठक में गंगनहर में शेयर मुताबिक पूरा पानी, मूंग पर पूरे MSP पर खरीद के लिए पोर्टल शुरू करने और गंगनहर में पानी के समान वितरण जैसी कई मांगों पर चर्चा की गई. किसानों ने अगली बैठक श्रीगंगानगर में मंगलवार को बुलाई है. किसान मोर्चा के आह्वान पर गंगानगर जिले के किसान संगठन सितंबर माह के पहले या दूसरे सप्ताह के बीच में आर-पार की लड़ाई को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं.
सिंचाई परियाजनाओं से हो रहा नुकसान
कॉमरेड श्योपत मेघवाल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से जिस प्रकार राजस्थान सरकार और सिंचाई विभाग ने हमारे क्षेत्र की सिंचाई परियोजनाओं को बर्बाद करने का काम किया, उससे गंगानगर-हनुमानगढ़-बीकानेर जिले में बिना पानी के पक्की फसलें बर्बाद हो रही हैं. बैठक में किसान संगठनों ने खखा हेड पर गेज लगाने, पानी का समान वितरण करने, पौंग डैम को क्षमता अनुसार 1410 फीट तक भरने, मूंग की फसल की MSP पर खरीद के लिए अभी से पोर्टल शुरू करने और प्रति आधार कार्ड पर 40 क्विंटल मूंग की सरकारी खरीद की मांग को लेकर 26 अगस्त को घोषणा करने का निर्णय लिया.
आर-पार के संघर्ष के लिए तैयार
किसान नेताओं ने कहा कि गंगनहर के पानी को लेकर 2016 से जो मुद्दे चल रहे हैं, उन्हें लेकर आने वाले दिनों में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आर-पार का संघर्ष किया जाएगा. कामरेड रविंद्र तरखान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पाकिस्तान को पानी रोकने का दावा झूठा है. पाकिस्तान जाने वाले पानी की मात्रा अब 1 लाख से बढ़कर 1 लाख तीस हजार हो गई है, जिसके चलते गंगनहर में शेयर मुताबिक पूरा 2500 क्यूसेक पानी की बजाय मात्र 1000 क्यूसेक ही मिल रहा है.
किसानों को पेयजल आपूर्ति संकट
पौंग डेम, जिसकी क्षमता 1410 फीट है, उसे लगातार खाली किया जा रहा है. यही सरकारें जनवरी-फरवरी में "किसानों को पेयजल आपूर्ति संकट" की बात कहेंगी. किसान नेताओं का कहना है कि पंजाब में बाढ़ जैसे हालात हैं और राजस्थान में सूखा पड़ने की कगार पर है. लंबे संघर्ष के बाद जो फसलों की बुआई की थी, वे पक्की फसलें अब बर्बाद होने की स्थिति में हैं, जो बेहद चिंताजनक है. स्पष्ट है कि किसानों के व्यापक संघर्ष के बिना खेतों में कुछ नहीं बचेगा. गंगानगर जिले में अब खेती के लिए ही नहीं बल्कि पीने के पानी के लिए भी त्राहि-त्राहि मची हुई है.
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